बेजुबानों का सहारा बनीं डॉ. शेफाली
हापुड़। जिनका कोई सहारा नहीं है, डॉ. शेफाली उनका ढाल बनी हुई हैं। दुर्घटना के शिकार अब तक चार हजार से अधिक बेजुबानों का उपचार कराकर उन्हें ठीक कर चुकी हैं। पैर और आंख गंवाने वाले 300 स्वानों को जीवन देने के बाद उन्हेें विदेशों में गोद दे चुकी हैं।
रांची की रहने वाली शेफाली वर्ष 2015 में हापुड़ आई थीं। सरस्वती मेडिकल कॉलेज से पांच साल तक एमबीबीएस की। अब इंटर्न डॉक्टर हैं। माता डिफेंस सेवा में हैं, पिता कारोबारी हैं। बचपन से ही शेफाली को जानवरों से लगाव रहा है। इसी के चलते उन्होंने हापुड़ में अनोखी पहल शुरू की। शेफाली बताती हैं कि बहुत से जानवर साधारण चोट लगने के बाद उपचार न मिलने के कारण गंभीर हो जाते हैं। उनके जख्म में कीड़े लग जाते हैं। ऐसे कई स्वानों की जान वह बचा चुकी हैं। साथ ही सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले जानवरों का भी वह खुद ही रेस्क्यू कराकर इलाज दिलाती हैं।
शेफाली ने बताया कि जानवरों को रखने और इलाज में आने वाले खर्च का पैसा उनके माता, पिता और वह खुद वहन करती हैं। जानवरों के स्वस्थ होने पर उन्हें ऐसे लोगों को ही निशुल्क गोद दिया जाता है, जो वास्तव में पशुओं को प्यार देकर अपने पास रखते हैं। हाल ही में पैर और आंख गवाने वाले 300 स्वानों को विदेशों में गोद दिया है। हर सप्ताह उनका फीडबैक भी लेती हैं।
नोएडा में बनाया आश्रय स्थल
शेफाली ने नोएडा में एक आश्रय स्थल बनाया हुआ है, जिसमें जख्मी पशुओं को रखती हैं। रोजाना वह नोएडा जाकर उनका देखभाल करती हैं। बाड़े में जानवरों की देखरेख में लगे लोगों के साथ खाने का इंतजाम भी कराती हैं।
मरणासन्न हालत में पहुंच चुके जानवर भी बचाए
जख्मों में कीड़े लगने के बाद मरणासन्न हालत में पहुंच चुके 1500 से अधिक स्वानों को शेफाली बचा चुकी हैं। ऐसे बेजुबानों को दो सप्ताह तक विशेष निगरानी में रखा जाता है। कीड़े हटाने के साथ ही पूरा उपचार कराना होता है।