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युवती की मौत के मामले में फंसे पिलखुवा कोतवाली प्रभारी

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युवती की मौत के मामले में फंसे पिलखुवा कोतवाली प्रभारी
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पिलखुवा (हापुड़)। गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी अनुसूचित जाति की युवती की मौत के मामले में पिलखुवा कोतवाली प्रभारी मुनीष प्रताप सिंह फंस गए हैं। सीबीसीआईडी मेरठ की जांच में उन्हें लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। मामला आठ अक्तूबर 2018 का है। तब मुनीष प्रताप सिंह सूरजपुर कोतवाली के प्रभारी थे। उनके साथ एसएसआई दलीप सिंह को भी दोषी माना गया है। गौतमबुद्धनगर में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मृतक युवती के पिता ने सूरजपुर थाने पर चार युवकों के खिलाफ तहरीर दी थी। तत्कालीन कोतवाल मुनीष प्रताप सिंह ने 15 अक्तूबर 2018 को रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक दलीप सिंह के सुपुर्द की थी। आरोप है कि विवेचना अधिकारी ने फाइनल रिपोर्ट लगा कर मामले को रफादफा कर दिया। जिसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत एससीएसटी एवं महिला आयोग से की। शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए 09 जुलाई 2021 को सीबीसीआईडी मेरठ को जांच के निर्देश दिए थे। सीबीसीआईडी के एएसपी राकेश कुमार सिंह ने मामले की जांच की तो लापरवाही उजागर हुई।
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लापरवाही की हुई इंतहा
जांच में सामने आया कि नामजद तहरीर मिलने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज करने में देरी की गई। धारा 354 का उल्लेख नहीं किया गया। युवती के साथ बदतमीजी की गई। तथ्य बताने के बावजूद कोई विवेचनात्मक कार्रवाई नहीं गई। मृतका की जाति का उल्लेख होने के बावजूद एससीएसटी एक्ट की धारा नहीं बढ़ाई गई। मृतक का विसरा प्रिजर्व किया गया, लेकिन उसे परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया। उपचार एवं पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए। मृतक के कपड़ों को भी परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। आरोपियों के मोबाइल नंबर प्राप्त कर उनकी सीडीआर भी नहीं निकाली गई। न तो परिजनों के बयान दर्ज किए गए और न ही पंचायतनामा भरने वाली महिला उपनिरीक्षक के।
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मामला मेरे संज्ञान में आया है लेकिन मुझे इसके बारे में कोई आधिकारिक सूचना फिलहाल नहीं मिली है। इस संदर्भ में जानकारी की जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -दीपक भूकर, एसपी, हापुड़।
13 मई 2022 को मिला था पिलखुवा कोतवाली का चार्ज
निरीक्षक मुनीष प्रताप सिंह का हापुड़ जनपद में स्थानांतरण विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था। उन्हें 13 मई 2022 को पिलखुवा कोतवाली का चार्ज दिया गया।
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