35 करोड़ से दुरुस्त होंगे नहर के जर्जर पुल और पुलिया
हापुड़। रजवाहों और माइनरों पर ब्रिटिश काल में बने जर्जर पुलों को दुरुस्त करने के लिए सिंचाई विभाग की अनूपशहर शाखा खंड गंगनहर ने कार्ययोजना तैयार की है। करीब 35 करोड़ की लागत से 150 पुलों और पुलियों की मरम्मत होगी। जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सिचाई विभाग की अनूपशहर शाखा खंड गंगनहर का क्षेत्रफल जनपद मुजफ्फरनगर, मेरठ हापुड़ और बुलंदशहर में आता है। डिवीजन क्षेत्र में 325.04 किलो मीटर लंबे रजवाहे हैं। जबकि 585 किलो मीटर लंबे माइनर हैं। रजवाहों और माइनरों से डिवीजन क्षेत्र में एक लाख 16 हजार एकड़ भूमि सिंचित होती है। चारों जनपदों में रजवाहों और माइनरों पर बने 150 पुल ऐसे हैं, जिनकी या तो मियाद पूरी हो चुकी है या ये जर्जर हो गए हैं। बावजूद इसके उन पर आवाजाही जारी है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का वहां से गुजरना मजबूरी है। इन्हीं रास्तों के जरिए ग्रामीण आने जाने के साथ फसल और गन्ने आदि की ढुलाई का कार्य भी करते हैं। ऐसी स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। किसानों की समस्याओं को देखते हुए सिंचाई विभाग के अफसरों ने इनके निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की है। विभाग ने ऐसे150 छोटे-बड़े पुल और पुलिया को चिन्हित किया है।
जिले हापुड़ की बात करें तो यहां इस खंड की सिंचित भूमि 22033 एकड़, रजवाहे 77.44 किलोमीटर, माइनर 65.20 किलोमीटर क्षेत्र में हैं। जबकि इनसे 167.91 लाख का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में इस खंड में हापुड़ का एक बड़ा हिस्सा आता है। ये सभी गढ़ क्षेत्र में आते हैं।
कोट-
जर्जर हो चुके पुराने पुलों की मरम्मत और निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। डिवीजन क्षेत्र में 150 पुलों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा छोटे टैंकों को बड़ा किया जाएगा। पैरापैट बाउंड्रीवाल बनाई जाएंगी, जिन स्थानों पर स्लैप की आवश्यकता है, वहां स्लैप डाली जाएंगी। इन कार्यों पर करीब 35 करोड़ का बजट खर्च होगा। जो पुल पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, उन्हें नए सिरे से बनाया जाएगा। अवर अभियंताओं की टीम कार्ययोजना बनाने में जुटी है। इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा। -राघवेंद्र कौशिक, सहायक अभियंता, खंड गंग नहर अनूपशहर।