गंगा एक्सप्रेसवे : सात फीसदी भूमि अधिग्रहण बाकी, शासन से मांगे 13 करोड़
हापुड़। गंगा एक्स्प्रेसवे के लिए जमीनों का अधिग्रहण अंतिम चरण में पहुंच गया है। अब केवल सात फीसदी भूमि का अधिग्रहण बचा है, इसके लिए शासन से 13 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया है। पूर्व में इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा शासन को डिमांड भेजी गई थी। बजट न मिलने के बाद अब इसके लिए रिमांइडर भेजा जा रहा है।
मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा 34 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया जाना है। हापुड़ में यह हाईवे 29 गांवों से होकर निकलेगा। इसमें हापुड़ तहसील के सात और गढ़मुक्तेश्वर के 22 गांव शामिल है। जिसकी लंबाई यहां 32 किलोमीटर है। किसानों से इस हाईवे निर्माण के लिए 418 हेक्टेयर भूमि खरीदी जाएगी।
जिले में भूमि अधिग्रहण के लिए 765 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। शासन द्वारा इस धनराशि के सापेक्ष अधिकतर बजट जारी किया जा चुका है। यूपीडा द्वारा निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अधिग्रहण की बात करें तो जिले में 93 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। जबकि सात प्रतिशत अधिग्रहण ऐसा है, जिसे लेकर कोई न कोई विवाद है। जिला प्रशासन इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। करीब 28 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण ही शेष बचा है। जिसमें से कुछ बैनामे हाल में हुए हैं। किसानों को मनाने के लिए कमेटी गठित की हुई है।
जो लोग बैनामा नहीं कर रहे हैं उनका तर्क था कि उन्हें स्थानीय सर्किल रेटों के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इन किसानों को मनाने के लिए सामाजिक सभाकार आंकलन समिति गठित करके शासन ने भेजा था। फिलहाल जिला प्रशासन के पास किसानों की भूमि अधिग्रहण के लिए सात करोड़ की धनराशि है और 13 करोड़ की धनराशि की दरकार है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। ताकि बाकी भूमि का भी अधिग्रहण जल्द से जल्द किया जा सके।
कोट-
एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन का कहना है कि गंगा एक्सप्रेस वे के लिए अधिकतर जमीन का बैनामा हो गया है, जबकि कुछ जमीन का बैनामा शेष है जिसमें लगभग पांच प्रतिशत जमीन ऐसी है जिनके किसानों की मुआवजे संबंधी अलग-अलग मांगे हैं। बैनामे के लिए शासन से धनराशि मांगी गई है।