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फुलडेरा डैम के शोधित पानी से लहलहाएंगी फसलें

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फुलडेरा डैम के शोधित पानी से लहलहाएंगी फसलें
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हापुड़। फुलडेरा के तालाब से निकले नाले के पानी को शोधित कर फसलों की सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाएगा। सिंचाई विभाग और एनजीटी मिलकर पांच करोड़ रुपये खर्च करेंगे। इसके लिए बजट जारी कर दिया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अगले पांच साल तक इसकी निगरानी करेंगे। 30 जुलाई तक इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।
फुलडेरा के तालाब से निकला नाला सिंभावली क्षेत्र से गुजरकर विभिन्न गांवों से होता हुआ स्याना से पूठ होते हुए गंगा में जाता है। इस नाले को शुद्ध करने की कवायद शुरू हो चुकी है। सिंचाई विभाग और एनजीटी की ओर से नाले को शोधित करने का काम शुरू हो चुका है। हाल ही में गढ़ विधायक हरेंद्र तेवतिया ने इसका शिलान्यास किया था। इस मॉडल के अनुसार नाले को फुल्डेहरा से लेकर पूठ तक पक्का किया जाएगा और उसमें विशेष विधि से बोल्डर (पत्थर) रखे जाएंगे। विभिन्न गांवों के इस नाले में गिरने वाले पानी को जाली लगाकर छानकर इसमें गिराया जाएगा।
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नाले के पानी को साफ करने के बाद इसका प्रयोग किसानों के लिए सिंचाई में भी किया जा सकेगा। दूसरे चरण में पानी को किसानों के खेतों तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। ऐसे में पानी की बर्बादी भी बचाई जा सकेगी। किसानों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। किसानों के लाभ के साथ इससे वातावरण भी शुरू होगा।
पांच साल तक निगरानी करेगी एनजीटी
यह अपनी तरह का उत्तर प्रदेश का पहला प्रयास होगा। नाले के भौतिक स्वरूप बदलने में सिंचाई विभाग सहयोग करेगा। जबकि इससे आगे का कार्य एनजीटी और दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर करेंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण टीम भी इसमें सहयोग करेगी। यह टीम बाइलोजिकल प्लांट इस नाले में लगाएगी, जिनके माध्यम से ही सही मायने में पानी को ट्रीट किया जाएगा। इसके लिए शासन से बजट जारी हो चुका है और जल्द ही कार्य हो जाएगा। निर्माण के बाद एनजीटी इस पूरे प्रोजेक्ट की अगले पांच साल तक निगरानी करेगी।
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अपने तरह के प्रदेश में पहला प्रोजेक्ट यहां सफल होता है तो इस प्रकार के प्रयास प्रदेश के दूसरे जिलों में भी होंगे। इसका कार्य शुरू कर दिया गया है। - शेर सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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