जिले के 273 गांवों में बनाए जाएंगे अमृत सरोवर
हापुड़। जल संरक्षण और लोगों की सहूलियत के हिसाब से गांवों में तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाएगा। तालाबों का सुंदरीकरण इस हिसाब से किया जाएगा कि तालाबों का पानी स्वच्छ हो, जिसमें लोग वोटिंग के साथ साथ तैराकी का भी आनंद ले सकें। जारी शासनादेश में जिला पंचायत राज विभाग को इसके लिए कार्ययोजना बनाए जाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एक तालाब के सुंदरीकरण पर दस से पंद्रह लाख रुपये की लागत लगने की उम्मीद हैं। हालांकि लागत तालाब के क्षेत्रफल पर निर्भर करेगी।
देश की आजादी के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भारत सरकार गांवों के तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करेगी। दरअसल, जल संरक्षण की पहल वैसे तो सालों से शुरू है, लेकिन इस दिशा में किए गए प्रयास अभी तक उतने कारगर साबित नहीं हुए हैं। भूगर्भीय जल के अत्याधिक दोहन और बरसात में आई कमी के कारण तालाब सूखने की कगार पर हैं। राजस्व विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 1244 छोटे और बड़े तालाब हैं। इनमें 500 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया। कई तालाब अतिक्रमण के शिकार होकर अस्तित्व भी खो चुके हैं। अब शासन ने एक एकड़ क्षेत्रफल में फैले तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। शुरूआत में जिले में 75 तालाबों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद हर गांव में एक तालाब को विकसित करने की योजना है। सबसे पहले तालाब की खुदाई होगी और उसके चारों तरफ चबूतरा बनाया जाएगा। एक ऐसा हॉल बनाया जाएगा, जहां गांव के लोग शादी भी कर सकते हैं। एक सरोवर के निर्माण पर करीब 10 से 15 लाख खर्च आएगा। इसमें हाल, सामुदायिक शौचालय, खुदाई संग अन्य व्यवस्थाएं शामिल रहेंगी। इस पर मनरेगा, वित्त आयोग व अन्य मद की रकम शामिल होगी।
तालाबों को जीर्णोद्धार में अभी तक खर्च हो चुका है करोड़ों रुपया
जल संरक्षण की मुहिम को धार देने के लिए तीन साल में 500 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। इस पर मनरेगा संग अन्य मदों से करीब दस करोड़ खर्च किए गए हैं। इस कार्य में कुछ तालाबों की स्थिति में तो वास्तव सुधार हुआ है, लेकिन कुछ तालाब पहले जैसी स्थिति में आ गए हैं। तालाबों पर अतिक्रमण हो गया है। ऐसे में अमृत सरोवर योजना को अधिकारियों को गंभीरता से लेना होगा।
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कार्ययोजना की जा रही तैयार
जिले के सभी 273 गांवों में अमृत सरोवर बनेंगे। एक एकड़ से ज्यादा जमीन वाले तालाब को अमृत सरोवर तालाब बनाया जाएगा। तालाब की खुदाई कराकर चारों तरफ आकर्षक चबूतरा बनेगा। सामुदायिक शौचालय से लेकर सामुदायिक भवन बनेगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
- विरेंद्र सिंह, डीपीआरओ
तालाबों में होगी बोटिंग
तालाबों को संरक्षित रखने के लिए उनके किनारों पर पौधरोपण का कार्य होगा। पर्यावरण संरक्षण को ज्यादातर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इनमें आम, जामुन, इमली, नीम, पीपल, कठहल, बरगद, सहजन, पाकड़, महुआ आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ साथ तालाब में बोटिंग कराई जाएगी। पानी को स्वच्छ रखने के सभी प्रयास किए जाएंगे। ताकि इसमें तैराकी का भी आनंद लिया जा सके। इसके अलावा अमृत सरोवर के एक कोने में झंडारोहण की व्यवस्था की जाएगी।