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बसों में नहीं सुरक्षा के इंतजाम, खतरे में नौनिहालों की जान

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शनिवार को गढ़ में स्कूल वैन में पीछे की और खड़े बच्चे । संवाद - फोटो : HAPUR
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बसों में नहीं सुरक्षा के इंतजाम, खतरे में नौनिहालों की जान
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हापुड़। एक तरफ परिवहन विभाग हादसे रोकने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह चला रहा है वहीं सड़कों पर बिना फिटनेस दौड़ रहे स्कूली वाहनों की तरफ आंखें मूंदी हुई है। गाजियाबाद के मोदीनगर में कक्षा चार के छात्र की मौत के बाद जब शासन की सख्ती हुई तो परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की। तीन दिन में भले ही 33 वाहन सीज किए हैं लेकिन अभी भी नौनिहाल खटारा वाहनों में सफर कर रहे हैं। बसों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है, कोई खिड़की से सिर बाहर निकाल रहा है तो कोई हाथ। देहात अंचल में स्थिति और भी गंभीर है। यहां के स्कूली वाहनों पर न तो नंबर है और न ही फिटनेस। जुगाड़, ई रिक्शा में भूसे की तरह बच्चों को ढोया जा रहा है, जिनमें सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। तस्वीरों में देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूलों की नजरों में बच्चों की जान कितनी सस्ती है।
सीन नंबर एक--दोपहर एक बजे
कार्रवाई का नहीं डर, नंबर प्लेट तक गायब
परिवहन विभाग को आइना दिखाते हुए गढ़ क्षेत्र में एक स्कूल की गाड़ी बिना नंबर प्लेट ही बच्चों को सफर कराती मिली। इस गाड़ी को रोकने वाला पहले कोई होता, तो इतनी लापरवाही नहीं दिखती। यह गलती इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है।
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सीन नंबर दो- दोपहर 01:15 बजे
एक गड्ढा...संकट में बच्चों की जान
ट्रांसपोर्ट के लिए स्कूल ने मैजिक गाड़ी को लगाया हुआ है। इस गाड़ी में बच्चों को देखने वाला कोई नहीं था, तीन बच्चे गाड़ी में पीछे खड़े नजर आ रहे हैं। हल्की धचकी लगने भर मात्र से ही बच्चों का सड़क पर गिरना तय है। अभिभावकों को नहीं पता पूरा शुल्क देने के बावजूद उनके बच्चे किस खतरे में सफर कर रहे हैं।
सीन नंबर तीन--दोपहर 01:20 बजे
ई रिक्शा में भूसे की तरह भरे 15 बच्चे
पिलखुवा में स्कूल की छुट्टी होने पर एक ई-रिक्शा सड़क किनारे खड़ी दिखी, इसमें 15 बच्चे बैठे थे। जबकि अन्य दो से तीन बच्चे बाहर खेल रहे थे। बच्चों के मुंह पर मास्क भी नहीं था वहीं ई-रिक्शा चालक गायब था।
सीन नंबर चार--दोपहर डेढ़ बजे
जुगाड़ पर सवार बच्चे, जोखिम भरा सफर
पिलखुवा क्षेत्र में कुछ स्कूलों ने जुगाड़ को भी बच्चों के ट्रांसपोर्ट में लगा दिया है। कमाई और टैक्स से बचने के लिए यह खेल चल रहा है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं। शनिवार को पिलखुवा में बच्चे जुगाड़ के बाहर लगे लकड़ी के फट्टे पर भी लटके थे।
सीन नंबर पांच-दोपहर 01:35 बजे
खिड़की से बाहर झांक रहे बच्चे
हापुड़ में एक स्कूल की बस में सवार बच्चे खिड़की से सिर बाहर निकालकर मस्ती कर रहे थे। हाल ही में गाजियाबाद की घटना से भी स्कूल सबक नहीं ले रहे। बस में कोई परिचालक तक नहीं है, जिसके कारण बच्चों की जान संकट में है। विद्यालयों की ओर से कोई ध्यान भी नहीं दिया जा रहा।
छह बसें सीज, 23 के चालान
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को सड़कों पर चेकिंग की। इस दौरान बिना कागजों के दौड़ने वाली छह बसों को सीज किया गया जबकि 23 स्कूली वाहनों के चालान किए। ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के पास कार्रवाई किए जाने वाले वाहनों की लाइन लग गई।
तीन दिन में हुई कार्रवाई-
23 अप्रैल- छह बस सीज, 23 वाहनों के चालान।
22 अप्रैल-12 स्कूली बस सीज
21 अप्रैल-15 स्कूली बस सीज
कोट -
मानकों को दर किनार कर वाहनों का संचालन करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छह बसों का सीज किया गया है, आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। बच्चों की जान को खतरे में नहीं डालने दिया जाएगा।--महेश शर्मा, एआरटीओ।
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कोट -
छात्रों की सुरक्षा को लेकर स्कूलों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समय रहते स्कूल खामियों को सुधार लें।--निशा अस्थाना, डीआईओएस।

शनिवार को गढ़ में स्कूल से छात्रों को ले जाती बिना नंबर की स्कूल बस । संवाद- फोटो : HAPUR

शनिवार को परतापुर रोड एक जुगाड़ में जाते एक स्कूल के बच्चे । संवाद- फोटो : HAPUR

शनिवार को परतापुर रोड एक रिक्शा में भूसे की तरह भरे एक स्कूल के बच्चे । संवाद- फोटो : HAPUR

शनिवार को टीपी नगर चौकी पर खडी आरटीओ विभाग द्वारा सीज की गई स्कूल की बस । संवाद- फोटो : HAPUR

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