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संचारी रोगों की दस्तक : जिले में मलेरिया के चार, टाइफॉयड के सात मरीज मिले

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जिले में मलेरिया के चार, टाइफॉयड के सात मरीज मिले
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हापुड़। जिले में संचारी रोगों ने दस्तक दी है, मलेरिया के चार और टाइफॉयड के सात मरीज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। बीते साल की तरह मच्छर जनित रोगों की दहशत फिर से फैलने लगी है। स्वास्थ्य विभाग ने दो गांवों को हाई रिस्क की श्रेणी में रखा है, जबकि 9 अन्य स्थानों को डेंगू के पनपने का केंद्र भी माना है। विशेषज्ञों की टीम लार्वा की जांच कर रही हैं, उधर बुखार के रोजाना 250 के करीब मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
बीते साल डेंगू ने जमकर कहर बरपाया था, जिले के हर क्षेत्र में मरीज मिले थे। लीवर फेल होने से कई लोगों की मौत हुई, हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में सिर्फ एक ही मौत दर्ज है। इस साल विभाग ने लार्वा नष्ट करने का अभियान चलाया हुआ है। लेकिन मलेरिया और टाइफॉयड के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि डेंगू का प्रकोप अभी शुरू नहीं हुआ है।
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सरकारी अस्पतालों में संचारी वार्ड बना दिए गए हैं, ताकि ऐसे मरीजों को सुरक्षित रख उनका उपचार किया जा सके। अस्पतालों में रेपिड किट के जरिए मलेरिया आदि की जांच भी की जा रही है। रात में मच्छरों के भयंकर प्रकोप से शहर, देहात जूझ रहे हैं।
ये दो गांव हाई रिस्क श्रेणी में शामिल
स्वास्थ्य विभाग में गांव बिगास और शाहपुर फगौता को हाई रिस्क की श्रेणी में रखा है। बिगास गांव में बीते साल सबसे अधिक डेंगू के 20 से अधिक मामले दर्ज हुए थे। जबकि इस गांव में 10 से अधिक लोगों की जान गई थी, हालांकि मौत का कारण स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू नहीं माना था। उधर, शाहपुर फगौता में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई थी, यह रोग करीब एक दशक बाद फिर से जिले में पनपा है।
इन 9 इलाकों में डेंगू फैलने के आसार
स्वास्थ्य विभाग डेंगू के लार्वा को नष्ट करने में लगा हुआ है, फिलहाल लार्वा कम ही मिल रहा है। लेकिन बीते साल फैले डेंगू की स्टडी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 9 स्थानों को चिन्हित किया है। इसमें रेलवे स्टेशन इलाका, रोडवेज अड्डा इलाका, दिल्ली रोड बस अड्डा, तहसील क्षेत्र का इलाका, रामपुर रोड का इलाका, गढ़ में खादर क्षेत्र को शामिल किया है।
दिमागी बुखार रोकना चुनौती
जिले में एक दशक बाद बीते साल पहली बार शाहपुर फगौता में दिमागी बुखार के मामला सामने आए। एक ही परिवार के तीन बच्चे बीमार मिले थे, यह रोग घातक है। इसमें संक्रमित होने पर पक्षाघात का असर आ जाता है। जिसे रोकना भी चुनौती होगा।
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बीते तीन सालों में डेंगू, मलेरिया की स्थिति
वर्ष डेंगू मलेरिया
2022 00 04
2021 230 34
2020 76 26
2019 86 47
कोट-
मच्छर जनित रोगों से निपटने की तैयारी पूरी है, लार्वा खोज का अभियान चलाया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। टीमों को निर्देशित कर दिया है। - डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ।
मलेरिया के लक्षण
- शरीर का तापमान बढ़ना (बुखार)
- सिरदर्द, पसीना आना
- ठंड लगना, उल्टी होना
- मांसपेशियों में दर्द होना
- दस्त, अस्वस्थ महसूस करना
डेंगू के लक्षण
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- शरीर में चकत्ते, भयंकर सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द होना
- उल्टी और जी घबराना
- शरीर पर खून के चकते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी होना शामिल है।
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