मौखिक परीक्षा - आठ हजार बच्चों को प्रधानमंत्री का नाम नहीं मालूम
हापुड़। परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षा में पहले दिन दो साल से प्रोन्नत होते आ रहे 10 फीसदी से अधिक छात्र प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री तक का नाम नहीं बता पाए। विषयों के सवालों में भी छात्र चुप्पी साध गए, अधिकांश स्कूलों में यही स्थिति रही।
जिले के परिषदीय स्कूलों में 84 हजार छात्र विभिन्न कक्षाओं में पंजीकृत हैं। मंगलवार से दो पालियों में इन छात्रों की वार्षिक परीक्षाओं का आगाज हुआ। पहले दिन दो पालियों में सिर्फ मौखिक परीक्षा थी। शिक्षकों ने अपने-अपने स्कूलों में छात्रों से पाठ्यक्रम और सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे।
इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र सामान्य जानकारी से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे पाए। थाना, पोस्ट ऑफिस, तहसील की जानकारी भी छात्रों को नहीं थी।
वर्ष 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान ही स्कूल बंद कर दिए गए थे, उस साल परीक्षा नहीं हुई थी। वर्ष 2021 में भी यही स्थिति रही। ऐसे में कक्षा एक में दाखिला लेने वाले छात्र बिना पढ़े और परीक्षा दिए ही कक्षा तीन तक आ गए। ऐसे छात्रों को अंग्रेजी के शब्दों का ज्ञान न के बराबर था, देश और प्रदेश से जुड़े सवालों के भी वह जवाब नहीं दे पाए।
बुधवार से दो पालियों में ही लिखित परीक्षाएं शुरू होंगी, यह परीक्षाएं 26 मार्च तक चलेंगी। 30 मार्च तक मूल्यांकन करना होगा, इसके बाद 31 मार्च को परिणाम भी घोषित किया जाना है। कुल मिलाकर कोरोना महामारी के बाद परीक्षा देने पहुंचे छात्रों का बौद्धिक स्तर पहले के मुकाबले कमजोर हुआ है।
कोरोना से प्रभावित हुई है पढ़ाई-
कोरोना महामारी से सबसे अधिक बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। विद्यालय खुलने पर छात्रों के कोर्स पूरे कराए गए। परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न करायी जाएंगी। 31 मार्च को रिजल्ट जारी किया जाएगा।--अर्चना गुप्ता, बीएसए।