कबाड़ हो जाएंगे 20 साल पुराने 21 हजार वाहन
हापुड़। पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की सरकार की वाहन कबाड़ नीति के तहत जिले के 20 साल पुराने 21021 वाहनों को तोड़कर कबाड़ में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए जिले में स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र बनाने की कवायद तेज हो गई है। परिवहन विभाग ने चार एकड़ भूमि के लिए डीएम को पत्र भेजा है। योजना को अगले चार माह में पूरा करने की तैयारी है।
सरकार की व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी के तहत ऐसे वाहनों को चलन से बाहर करना है जो प्रदूषण फैलाते हैं। इसी पॉलिसी के तहत 20 साल से ज्यादा पुराने वाहन अगर फिट नहीं पाए गए तो उन्हें स्क्रैप यानि कबाड़ में तब्दील कर दिया जाएगा। इसके बाद सरकार की तरफ से लोगों को नई कार खरीदने के लिए इंसेटिव भी दिया जाएगा। जिले में 20 साल पुराने लगभग 21021 भारी व हल्के वाहन हैं, जिन्हें कबाड़ में तब्दील किया जाएगा। स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र बनाने के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों ने डीएम को पत्र भेजकर चार एकड़ भूमि दिलाने की मांग की है। केंद्र में वाहन को स्क्रैप करने के लिए कई मशीनें लगाई जाएंगी। लेकिन जिन वाहनों का री-रजिस्ट्रेशन हो चुका है। वह स्क्रैप नीति लागू होने के बाद कबाड़ श्रेणी से दूर होंगे। यानी ऐसे वाहनों को स्क्रैप नहीं किया जाएगा।
--
ये है फिटनेस का नियम
संभागीय परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक कॉमर्शियल नए वाहन का दो साल के लिए फिटनेस किया जाता है। अगर वाहन आठ साल पुराना हो गया है तो उसका एक-एक साल पर फिटनेस किया जाएगा। अगर वाहन मेें कोई खराबी नहीं है तो एक-एक साल पर फिटनेस किया जाएगा। मगर वाहन में कोई तकनीकी खराबी है तो संभागीय निरीक्षक प्राविधिक यह तय करेंगे कि वाहन फिटनेस के लायक नहीं है। इसके अलावा निजी वाहनों का 15 साल पर फिटनेस का प्रावधान है।
--
पांच साल का होता है री-रजिस्ट्रेशन
भारी वाहनों ट्रक, कंटेनर के साथ ही हल्के वाहनों का पहली बार रजिस्ट्रेशन 15 साल के लिए होता है। मगर रजिस्ट्रेशन समाप्त होने पर उनकी री-रजिस्ट्रेशन सिर्फ पांच साल के लिए किया जाता है। इस बीच अगर वाहन अनफिट हो गया तो उसका री-रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है।
फिटनेस में फेल वाहन होंगे कबाड़
नए नियमों के तहत फिटनेस में फेल वाहन भी कबाड़ कर दिए जाएंगे। वाहन मालिकों को कबाड़ वाहनों को कटवाने के लिए स्क्रैप सेंटर से मिली रसीद के साथ ही चेसिस नंबर दिखाने पर इनके पंजीकरण निरस्त कर दिए जाएंगे।
- अजीत श्रीवास्तव, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन