बारिश से जलमग्न हुए रेलवे के अंडरपास, आवागमन बंद
हापुड़। रेलवे के फाटकों को मानव रहित बनाने के लिए बनाए गए अंडरपास ग्रामीणों के लिए नासूर बन गए हैं। शुक्रवार से शनिवार देर रात तक पड़ी बारिश के कारण अंडरपास जलमग्न हो गए। जिस कारण ग्रामीणों का आवागमन बंद हो गया और उनका रास्ता बाधित हो गया। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि हर बरसात में जलभराव की परेशानी होने के बाद भी अफसर इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
रेलवे फाटक बंद होने के बाद लगने वाले जाम और आए दिन होने वाले दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे ने अंडरपास बनाए हुए हैं। हापुड़ डिविजन में करीब 20 अंडरपास बनाए गए हैं। इन अंडरपास को बनाते समय ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन, रेलवे के अधिकारियों ने उनकी एक बात नहीं सुनी। अब हालत यह है कि डिविजन में जितने भी अंडरपास बने हुए हैं वहां, से होकर जाने वाले ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उसका कारण यह है कि अंडरपास बनाने से पहले अधिकारियों ने बरसात में होने वाले जलभराव की निकासी की किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की। जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। अंडरपास के पानी को सोखने के लिए बने सोखते सिल्ट से अटे हुए हैं। जिसके कारण पानी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तक नहीं पहुंच पाता है। जिसके कारण बारिश के बाद अंडरपास पानी से लबालब हो जाते हैं।
तीन से चार फीट तक भर जाता है पानी
बारिश के बाद अंडरपास में पानी तीन से चार फीट तर भर जाता है। जिस कारण दोपहिया वाहन और कार बीच में ही बंद हो जाती है। पैदल आवागमन करने वाले लोगों को पानी से होकर जाना पड़ता है। सुबह को नौकरी करने जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
इन गांवों के बाहर बने हैं अंडरपास
खुर्जा से मेरठ के बीच हापुड़ की सीमा में महमूदपुर, दादरी, पांची, सेतकुआ, चांदसारा, नवादा आदि गांवों के बाहर अंडरपास बने हैं। इन अंडरपासों से होकर दर्जनों गांवों को रास्ता जाता है।
कराया जाएगा स्थाई समाधान
आईओडब्ल्यू विपिन त्यागी ने बताया कि पंप की सहायता से अंडरपासों में भरे पानी को निकलवाया जा रहा है। जलभराव की समस्या का स्थाई समाधान कराया जाएगा। लोगों को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।