जिले की 60 फीसदी सरकारी एंबुलेंस खराब, कैसे होगा इलाज
हापुड़। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आयी तो स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस साथ नहीं दे पाएंगी। 60 प्रतिशत से अधिक गाड़ियां कंडम हो चुकी है, जिनमें किसी की फिटनेस नहीं है। वहीं घिसे हुए टायर, टूटी बॉडी और लचकती धुरी मरीजों की जान पर कभी भी आफत बन सकती है। विभाग के बेड़े में नई गाड़ियां सालों से शामिल नहीं हुई, जबकि दूसरी लहर में सरकारी एंबुलेंस की कमी से कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ी थी।
वर्ष 2012 में स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवा का संचालन हुआ था। उस समय हापुड़ को 25 गाड़ियां शासन से मिली थी। बाद में दो एएलएस गाड़ियां भी स्वास्थ्य विभाग को मिली। इन एंबुलेंस पर जिले की 20 लाख आबादी की जिम्मेदारी है। वर्तमान में 60 फीसदी सरकारी एंबुलेंस की हालत ठीक नहीं है। निजी अस्पतालों की एंबुलेंस का किराया काफी अधिक है, जिसे सभी लोग वहन नहीं कर सकते हैं।
दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस कम पड़ गई थीं, प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने मरीजों से जमकर लूट मचायी। मजबूरन जिला प्रशासन को रेट तक तय करने पड़े थे, भविष्य में यदि इस सेवा में सुधार नहीं हुआ तो मरीजों को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। फरवरी माह में विशेषज्ञ तीसरी लहर की आशंका व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस की मरम्मत तक कराने की जहमत नहीं उठाई है। सेवा में विस्तार की कोई योजना तक नहीं बना रहा है।
जिले में एंबुलेंस की स्थिति-
108 नंबर----09
102 नंबर----16
एएलएस-----02
पंक्चर हुआ तो स्टेपनी भी नहीं आएगी काम-
एंबुलेंस के टायर पूरी तरह घिस चुके हैं, लेकिन अफसरों का ध्यान इस पर नहीं जाता। गाड़ी के अंदर आपात स्थिति के लिए रखी स्टेपनी भी खराब है। ऐसे में गंभीर मरीज को लाते ले जाते यदि टायर में पंक्चर हुआ तो स्टेपनी काम नहीं आ सकेगी। इससे मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।
टूटी बॉडी, साइड मिरर तक नहीं
एंबुलेंस में गंभीर मरीजों को ही सफर कराया जाता है, ऐसे में साधन भी दुरुस्त होना चाहिए। लेकिन सरकारी एंबुलेंस की बॉडी गल चुकी हैं, साइड मिरर और इंडीकेटर भी टूटे पड़े हैं। रात में इनका संचालन करना काफी मुश्किल होता है।
तीन महीने से नहीं मिला मानदेय
एंबुलेंस के कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें तीन महीने से मानदेय भी नहीं मिल सका है। स्टॉफ की कमी के कारण 24 घंटे ड्यूटी करायी जा रही है। ओवर टाइम का पैसा मांगा जाता है तो उन्हें बाहर निकाल देने की धमकी दी जाती है।
बिना फिटनेस हो रहा संचालन
स्वास्थ्य विभाग की कई एंबुलेंस की फिटनेस तक नहीं हो पायी है, जिन गाड़ियों की फिटनेस है उनकी हालत देखकर खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिटनेस टेस्ट में वह कैसे पास हुई होंगी।
आग बुझाने के यंत्र तक गायब-
एंबुलेंस में मरीजों की सुरक्षा के लिए आग बुझाने के यंत्र भी उपलब्ध होते हैं। लेकिन कई एंबुलेंस में यंत्र तक नहीं लगाए गए। इससे मरीजों की जान पर हर समय खतरा बना रहता है।
बेहतर होंगी सुविधा
एंबुलेंस संबंधी समस्या से मरीजों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। इस सेवा के जिला प्रभारी से जानकारी कर, बेहतर संचालन कराया जाएगा। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
सरकारी एम्बुलेंस के अंदर रखी फ़टी हुई स्टपनी संवाद- फोटो : HAPUR
टूटी पड़ी सरकारी एम्बुलेंस संवाद- फोटो : HAPUR
टूटी पड़ी सरकारी एम्बुलेंस की लाइट संवाद- फोटो : HAPUR
सरकारी एम्बुलेंस के घिसे पड़े टायर संवाद- फोटो : HAPUR