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प्रदूषण गले के साथ कानों को कर रहा सुन्न

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जहरीली हवा गले के साथ कानों को कर रही सुन्न
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हापुड़। जिले में प्रदूषण का बढ़ता असर लोगों की सेहत खराब कर रहा है। इसकी वजह से नाक और गला के मरीजों की संख्या तो बढ़ ही रही है। लेकिन कान सुन्न रहने की समस्या भी सामने आ रही है। सरकारी अस्पताल की ओपोडी में रोजाना 35 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
प्रदूषण बढ़ने और मौसम में बदलाव का असर अस्पतालों की ओपीडी में भी देखने को मिल रहा है। पिछले काफी दिनों से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ है। निजी चिकित्सकों के यहां भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
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ओपीडी में आने वाले करीब 150 मरीजों में गले में दर्द, कान में दर्द, कम सुनाई देने जैसी समस्या के 10 से 15 मरीज आते थे। अब यह संख्या 30 से 35 तक पहुंच गई है। इस समय धूल, धुआं अधिक होने से गले में दर्द की समस्या होती है। मरीजों में नाक में दर्द, जुकाम होने की समस्या भी बनी है।
ईएनटी चिकित्सक डॉ. टीसी चौहान का कहना है कि ओपीडी में गले में खराश, कान में दर्द वाले 10 से 15 मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे लोग घर से बाहर निकलते समय नाक, मुंह ढककर ही निकलें। सुबह और शाम गुनगुने पानी से गरारा जरूर करें। जरूरत के हिसाब से भाप भी लें। ऐसे लोगों को बिना मास्क लगाए बाहर निकलने से परेशानी हो सकती है। सबसे बड़ी बात है कि बिना जांच के दवाई न लें।
नहीं सुधर रहे हालात
जिले में प्रदूषण के हालात नहीं सुधर रहे हैं। शनिवार को जिले में प्रदूषण का स्तर कुछ अंक गिरा जरूर, लेकिन अभी भी जिला रेड जोन में है। शनिवार को जिले का एक्यूआई 178 दर्ज किया गया। जो अभी भी खतरनाक स्थिति में है। मौसम की बात करें तो शनिवार को भी वातावरण में धुंध छाई रही। लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आंखों में जलन और सांस लेने में लोगों को परेशानी हुई।
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कोट-
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के स्टेशन इंचार्ज सलमान राणा का कहना है कि वातावरण में कोहरे के कारण नमी बढ़ी है और धूल के कणों की स्थिति अधिक हुई है। लोग अपने आसपास के क्षेत्र में छिड़काव करें और धूल को न उड़ने दें।
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