जहरीली हवा ने 11 दिनों में 300 लोगों को बना दिया सांस रोगी
हापुड़। जिले में हवा के बिगड़े मिजाज ने 300 लोगों को सांस का रोगी बना दिया है। पहले से इलाज करा रहे 850 मरीजों की हालत और खराब हो गई है। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 100-120 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। गले की खराश और खांसी दम उखाड़ रही है। 17 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती भी हैं।
चार नवंबर को जिले का एक्यूआई अचानक बढ़कर 315 पहुंच गया था, जो निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। सोमवार को जिलेभर के अस्पतालों की ओपीडी में 2530 मरीज पहुंचे, इनमें 120 मरीज सांस की समस्या से पीड़ित मिले। चिकित्सक मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
फेफड़ों, हृदय तक पहुंचे कार्बन तत्व
फिजिशियन डॉ पुष्पेंद्र वत्स ने बताया कि धूल धुआं और कार्बन के घातक तत्व फेफड़े हृदय तक पहुंच रहे हैं। इससे हृदय तक ऑक्सीजन कम पहुंच रही है। छाती में दर्द हो रहा है, हृदयघात का खतरा भी बढ़ गया है। ओपीडी में आने वाले इस तरह के मरीजों का एक्सरे कराना पड़ रहा है, फेफड़ों में कार्बन तत्व भी मिल रहा है।
सांस को बढ़ाने वाले कारक
सांस को बढ़ाने वाले कारकों में ठंड, कोहरा, धुंध, धुआं, धूल, प्रदूषण, संक्रमण, पेंट की गंध, परागकण हैं, इसके अलावा बंद घरों के भीतर रहने वाले पालतू कुत्ते और बिल्लियों के बालों से भी सांस के मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं।
सोमवार को 342 रहा एक्यूआई
सोमवार को एक्यूआई का स्तर कुछ कम हुआ, लेकिन हवा सांस लेने योग्य अभी भी नहीं है। एक्यूआई का स्तर 342 रहा। लगातार 11वीं दिन दमघोंटू हवा से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।