घर में चल रहा था नर्सिंग होम, रसोईघर में बना रखा था ओटी
हापुड़। स्वर्ग आश्रम रोड के मोहल्ला विद्यानगर में बिना पंजीकरण चल रहे सिरोही नर्सिंग होम को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। अंबेडकर नगर निवासी प्रसूता के ऑपरेशन में लापरवाही की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई। नगर के डिग्रीधारक चिकित्सक यहां धड़ल्ले से सर्जरी कर, मरीजों की जान आफत में डाल रहे थे। जिनकी रिपोर्ट ऊपर भेजी गई है, एफआईआर की भी तैयारी है।
गौरतलब है कि मोहल्ला अंबेडकर नगर निवासी प्रीति पत्नी दीपक को स्वास्थ्य विभाग की आशा सुषमा गुमराह कर, इस अस्पताल में ले आयी थी। यहां प्रसव के बाद चिकित्सक ने टांके लगाने के दौरान घोर लापरवाही की। घर जाते ही टांके टूट गए और प्रसूता का शरीर बाहर आ गया। इस मामले को लेकर पीड़िता की सासु ने डीएम के सामने कार्रवाई की गुहार लगाई। डीएम ने मामले का संज्ञान लेकर, स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए।
शुक्रवार शाम को सीएचसी अधीक्षक डॉ दिनेश खत्री, डॉ आनंद यादव टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। हर कमरे में मरीज भर्ती थे, जिसमें तीन ऑपरेशन व एक डेंगू का मरीज भर्ती किया गया था। इन मरीजों की जान पर खतरा देख, डॉ दिनेश खत्री ने एंबुलेंस के जरिए उन्हें अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कराया। मरीजों के नाम सुंदरी, पूजा, अमीना, शीशपाल बताया गया है। अस्पताल को सील कर, आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
-किचन में होते थे हर महीने 12-15 ऑपरेशन-
अस्पताल का घर में चल रहा था, जिसकी किचन में हर महीने 12-15 ऑपरेशन किए जा रहे थे। यहां गंदगी के अंबार लगे थे, दवाएं भी इधर उधर बिखरी पड़ी थी।
-अस्पताल में नहीं था कोई स्थाई चिकित्सक-
स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे ही बड़े स्तर पर इस अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। इसमें न तो कोई स्थाई चिकित्सक था और न ही रजिस्टे्रशन फिर भी इसे चलाया जा रहा था। इसे स्वास्थ्य विभाग की नाकामी कहें या संरक्षण, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।
-ऊपरी तल पर बना था जनरल वार्ड-
अस्पताल के ऊपरी तल पर जनरल वार्ड बना था, जहां बुखार व अन्य रोगियों को रखा जा रहा था। अकुशल स्टॉफ मरीजों को उपचार देने में लगे थे।
-नियमों की अनदेखी कर चल रहा था अस्पताल-
यह अस्पताल रिहायसी इलाके में था, जो रेलवे लाइन से महज 50 मीटर की दूरी पर था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार रिहायसी इलाके में अस्पताल नहीं बन सकता। रेलवे लाइन से भी 220 मीटर की दूरी पर अस्पताल होना चाहिए।
-आशा खोलेगी राज-
जिस मरीज की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है, उस मरीज को स्वास्थ्य विभाग की आशा ही लेकर आयी थी। आशा पर कार्रवाई कर, इस गोरखधंधे में जुटी अन्य आशाओं की सच्चाई भी सामनेश् लायी जाएगी।
-महिला पुलिस कर्मी के घर में चल रहा था अस्पताल-
विद्यानगर में जिस अस्पताल पर कार्रवाई हुई है, वह एक महिला पुलिस कर्मी का घर बताया गया है। हालांकि अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद वसीम खान ने बताया कि यह घर किराए पर लिया हुआ था।
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-दो डिग्री धारक चिकित्सक करते थे ऑपरेशन-
अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद वसीम खान ने बताया कि डॉ एचके अहलावत जिनका फ्रीगंज रोड पर क्लीनिक है वह यहां आकर इलाज करते थे, साथ ही डॉ योगेश मिश्रा सर्जरी करने के लिए यहां आते थे।
-व्हील चेयर नहीं, हाथों में उठाकर ले गए मरीज-
अस्पताल में बदहाली का आलम यह रहा कि यहां मरीजों के लिए व्हील चेयर भी नहीं थी। मरीजों को हाथों में उठाकर ही तीमारदार बाहर लेकर गए।
-आईएमए ने कार्रवाई की कही बात-
नियमों को ताक पर रख, गलत कार्य करने वालों का आईएमए समर्थन नहीं करेगी। स्वास्थ्य विभाग को एसोसिएशन के साथ बैठक कर, फर्जी तरीके से संचालित अस्पताल, पैथेलोजी लैब पर कार्रवाई करनी चाहिए।--डॉ विक्रांत बंसल, सचिव, आईएमए।
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-अस्पताल पर होगी एफआईआर, चिकित्सकों को नोटिस-
प्रकरण काफी गंभीर है, इस मामले में अस्पताल के खिलाफ एफआईआर होगी। साथ ही यहां सर्जरी करने वाले चिकित्सकों को नोटिस जारी किया जाएगा। अस्पताल का रजिस्टे्रशन नहीं है, मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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जतिन त्यागी 08एचपीआर10