गंगा को निर्मल बनाने के लिए छोड़े 229 कछुए
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा को साफ रखने के उद्देश्य से गढ़ के गांव पुष्पावती पूठ में नीति आयोग और वन विभाग की ओर से प्रभावी पहल की गई। वन्य प्राणी सप्ताह के तहत गंगा तट पर गंगा संरक्षण के लिए 229 कछुए गंगा में छोड़े गए। इसके बाद पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
गढ़ तहसील क्षेत्र के समग्र गंगा ग्राम पुष्पावती पूठ में रविवार को वन विभाग के तत्वाधान में वन्य प्राणी सप्ताह के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य रूप से नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, विनीता शंकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय, संजय श्रीवास्तव, मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन एनके जानू, वन संरक्षक मेरठ राजेश निगम, प्रभागीय वनाधिकारी गौतम सिंह, रेंजर गढ़ राजेश कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम में नीति आयोग उपाध्यक्ष समेत अन्य अधिकारियों ने तीन संकट ग्रस्त प्रजातियों के 229 कछुए गंगा में छोड़े। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण से निजात पाने के लिए पौधारोपण भी किया गया। इस मौके पर रवींद्र प्रताप, आचार्य राजीव कुमार, कुलदीप, दिनेश कुमार, महेश केवट, कलुआ भगत, वन दारोगा अनुज जोशी, गौरव गर्ग समेत अन्य लोग मौजूद रहे। संवाद
मेरठ कछुआ प्रजन्न केंद्र से आए थे कछुए
कछुआ नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। पर्यावरणविद् भारतभूषण गर्ग ने बताया कि ये गंगा में बहाए गए अधजले शवों, पशु अवशेषों को खाकर गंगा को स्वच्छ बनाते हैं। इसके चलते हस्तिनापुर से नरौरा तक प्रतिवर्ष कछुए छोड़े जाते हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संजीव यादव ने बताया कि वर्ष 2013 में मखदूमपुर गंगा घाट से कछुआ पुनर्वास योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत गंगा नदी में अब तक 3729 कछुए छोड़े जा चुके हैं।
पूठ के घाट का होगा समुचित विकास
प्रधान मुख्य सुनील पांडेय ने बताया कि कछुआ संरक्षण परियोजना, वन्य जीव संरक्षण और वेटलैंड सरंक्षण परियोजना के तहत लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए खसखस घास के रोपण के प्रशिक्षण के साथ ही उसके उत्पाद तेल का प्रोजेक्टर तैयार किया जाएगा। वहीं अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी के किनारे बायो डायवर्सिसटी पार्क का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही पुष्पावती पूठ के गंगा तट का समुचित विकास कराया जाएगा।