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वायरल पीड़ित बच्चों के फेफड़ों में मिल रहा संक्रमण

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सरकारी अस्पताल में छोटे बच्चे के खून की जाँच कराते परिजन। संवाद - फोटो : HAPUR
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वायरल पीड़ित बच्चों के फेफड़ों में मिल रहा संक्रमण
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हापुड़। जिले में वायरल बुखार का फैलाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में आने वाले बच्चे निमोनिया के साथ-साथ फेफड़े के संक्रमण, ब्रोंकाइटिस जैसी गंभीर समस्याओें से जूझ रहे हैं। सांस लेने में भी बच्चों को काफी समस्या आ रही है। फेफड़ों पर जमी सफेदी देख चिकित्सक भी हैरान हैं। निजी अस्पतालों में इस रोग से पीड़ित 25 से अधिक बच्चे भर्ती हैं।
ब्रोंको निमोनिया से पीड़ित बच्चों के फेफड़ों पर कफ जमने से उनकी सांसें तेजी से चल रहीं हैं। बुखार के साथ खांसी और जुकाम के चलते सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। जिनका उपचार घरों में संभव नहीं हैं, इस रोग की प्राइमरी स्टेज पर घर पर ही दवा गोलियों से बच्चा स्वस्थ हो रहा है। जबकि दूसरी स्टेज में पहुंचे बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। चिकित्सकों का भी कहना है कि ज्यादातर बच्चों को अस्पताल में तब लाया जा रहा है, जब उन्हें सांस फूलने की तकलीफ हो रही है।
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ब्रोंको निमोनिया के लक्षण ब्रोंको निमोनिया ज्यादातर चार से पांच साल की उम्र के बच्चों में हो रहा है। गले में खराश, खांसी, हल्का बुखार, नाक में कफ जमना, दस्त, भूख कम लगना और थकान या एनर्जी कम महसूस होना इसके लक्षण हैं। इसके गंभीर लक्षण हैं तेज बुखार, पसीना आना या ठंड लगना, नाखूनों या होठों का नीला पड़ना, सीने में घरघराहट महसूस होना और सांस लेने में दिक्कत महसूस होना।
बचाव के तरीके
* बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें।
* कूलर, एसी का बच्चों को परहेज कराएं।
* गर्मी होने पर हल्का पंखा चलाएं।
* बच्चों को ठंडी खाद्य सामग्री व पेय न दें।
* बच्चों को संतुलित और पौष्टिक भोजन दें।
बच्चों के लिए खतरा है निमोनिया
छोटे बच्चों के लिए निमोनिया सबसे बड़ा खतरा होता है। इन दिनों मौसम परिवर्तन चल रहा है, जिसमें निमोनिया से ग्रस्त बच्चों की संख्या बढ़ी है। समस्या होने पर चिकित्सक का परामर्श लें। अपनी समझ से बच्चों को दवा न दें।--डॉ योगेश गोयल, बाल रोग विशेषज्ञ।--फोटो संख्या--
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बिना परामर्श के न दें दवाई
अस्पताल में ब्रोंको निमोनिया से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। इन बच्चों के फेफडों में कफ जम रहा है। जबकि वायरल से पीड़ित बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्सकों का बिना परामर्श के बच्चों को दवाई न दें, उनका इलाज कराएं। - डॉ सचिन बंसल, बाल रोग विशेषज्ञ।-फोटो संख्या--
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जतिन त्यागी 11एचपीआर04
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