गांवों में नहीं कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे सफाई कर्मी
हापुड़। प्रधानमंत्री भले ही साफ सफाई को लेकर स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हों, लेकिन अधिकारी अपनी सहूलियत के लिए इस अभियान को पलीता लगा रहे हैं। जिले में तीस हजार से अधिक वेतन पाने वाले सफाई कर्मचारी अपने मूल दायित्वों से अलग हटकर अधिकारियों की खिदमत में जुटे हैं। ब्लॉक हो या जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय के अलावा अधिकारियों के पास भी सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। जबकि जिले के करीब दस प्रतिशत गांवों में सफाई कर्मचारी नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर मुहिम चलाई जा रही है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भारी भरकम बजट भी खर्च किया गया है। लेकिन मूल रूप से सफाई का कार्य करने वाले ही अधिकारियों की सेवा में लगे हैं। यह विडंबना ही है कि करीब दस प्रतिशत गांवों मेें सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि सफाई कर्मचारियों की जिले में संख्या कम है, लेकिन बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों को निजी और विभागीय कार्यों के लिए कार्यालयों में तैनात किया हुआ है। कुछ सफाई कर्मचारी तो बाबुओं का काम देख रहे हैं वहीं कुछ अधिकारियों के पास अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जिले में कुल 273 ग्राम पंचायतें और 360 राजस्व ग्राम हैं। वर्तमान में इन गांवों में साफ सफाई की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर है। गांवों में जगह जगह कूड़ों के ढेर लगे रहते हैं और लोगों द्वारा इस संबंध में आए दिन शिकायतें भी होती रहती हैं। लेकिन तीस से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपने मूल कार्य से दूर रखा गया है। जिसके कारण गांवों की सफाई व्यवस्था चौपट पड़ी है।
वर्षों से मलाई मार रहे कर्मचारी
- सफाई कर्मचारियों को उनके मूल कार्यों से हटाकर कार्यालयों और अधिकारियों की निजी सेवा में अटैच करने का खेल ताजा नहीं है, वर्षों से सफाई कर्मचारी इन विभागों में मलाई मार रहे हैं। कई कार्यालयों में सफाई कर्मचारी कंप्यूटर और मुख्य कार्यालय संभाल रहे हैं। अधिकारियों की सह के कारण ऐसे सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। वहीं कुछ सफाई कर्मियों कोे प्रशासनिक अधिकारियों के यहां भी तैनात किया गया है।
ग्राम प्रधानों ने अपने निजी खर्चे पर रखे सफाई कर्मचारी
- गांवों में सफाई व्यवस्था सही ढंग से हो सके और प्रधानों की राजनीतिक छवि बची रहे, इसके लिए कई गांव ऐसे हैं, जिनमें प्रधानों ने अपने निजी खर्चे पर सफाई कर्मचारियों को कुछ दिन सफाई के लिए रखा हुआ है। प्रधान सप्ताह में कुछ दिन इनसे काम लेकर इनका मेहनताना चुका देते हैं।
गांव छपकौली के ग्राम प्रधान अजयपाल चौधरी ने बताया कि उनके गांव में कोई भी सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं है। गांवों की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए उन्हें अपने निजी खर्चे पर काम कराना पड़ता है। एक सफाई कर्मचारी को एक दो दिन छोड़कर गांव में सफाई कराई जाती है, इसके लिए तीन सौ रुपये प्रतिदिन अपनी जेब से भुगतान किया जाता है।
आलमपुर भगवंतपुर के प्रधान संजीव त्यागी ने बताया कि उनके क्षेत्र की करीब आठ ग्राम पंचायतों में दो सफाई कर्मचारियों की तैनाती है। दो सफाई कर्मचारी बारी-बारी से गांवों की सफाई करते हैं। जिससे गांवों में सफाई दुुरुस्त रख पाना काफी मुश्किल हो रहा है।
कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी
- सफाई कर्मचारियों को कार्यालय से अटैच कराने के पीछे अधिकारियों का कहना है कि विभागों में कर्मचारियों की कमी किसी से छिपी नहीं है। इसके लिए शासन को कई बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है, लेकिन नई नियुक्ति न होने के कारण एक एक लिपिक कई कई पटलों का कार्य देख रहा है। साथ ही सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों से भी मजबूरन कार्य लेना पड़ रहा है।
कोट
जिला पंचायत राज विभाग अधिकारी यावर अब्बास का कहना है जिले में कुल 360 राजस्व ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें से अधिकतर में सफाई कर्मचारी तैनात हैं। जिले में 13 सफाई कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्ति होने के बाद जिले के अधिकतर गांवों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती करा दी जाएगी।