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पौष अमावस्या पर दो लाख भक्तों ने गंगा में लगाई डुबकी

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ब्रजघाट में पौष अमावस्या पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। - फोटो : GARH
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पौष अमावस्या पर दो लाख भक्तों ने गंगा में लगाई डुबकी
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गढ़मुक्तेश्वर। पौष अमावस्या के पर्व पर विभिन्न प्रांतों से आए दो लाख से अधिक गंगा भक्तों ने ठिठुरती सर्दी के बीच गंगा की जलधारा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्यार्जित किया। मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना कर दान-पुण्य भी किया।
पौष माह की अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए विभिन्न राज्यों और दूर दराज के जनपदों के भक्तों का आगमन शनिवार की शाम ही शुरू हो गया था। रविवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के में करीब चार बजे अधिकांश भक्तों की भीड़ किनारे पर पहुंच गई थी, जहां प्रात:काल के ब्रह्म मुहूर्त में मुख्य स्नान पर्व प्रारंभ होते ही ठिठुरती सर्दी की परवाह किए बिना भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया था। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद किनारे पर बैठे पंडितों से भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी और तीर्थनगरी के मंदिरों में पहुंचकर अपने ईष्ट देवों के समक्ष मत्था टेककर परिवार की खुशहाली की कामना करने के साथ की समूचे विश्व को कोरोना संक्रमण समेत अन्य महामारियों से मुक्ति दिलाने की भी कामना की। इसके अलावा स्थानीय लोगों ने भी गांव लठीरा और पुष्पावती पूठ के घाटों पर पहुंचकर स्नान किया।
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पौष अमावस्या पर पिंड दान का विशेष महत्व
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि पौष अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इस दिन स्नान, पूजा, जाप और तप का विधान है। वहीं पितरों के लिए पिंड दान करने और दान करने से उन्हें संतुष्टि मिलती है। जिसके चलते अधिकांश गंगा भक्तों ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंड दान भी किया।
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अलाव समेत सफाई व्यवस्था की गई
पौष अमावस्या के मद्देनजर पालिका द्वारा गंगानगरी में विभिन्न चौराहों, गंगा तट के निकट अलाव की व्यवस्था की गई। इसके अलाव रैन बसेरा में भी समुचित व्यवस्था की गई। पालिकाध्यक्ष सोना सिंह ने बताया कि सफाईकर्मियों को गंगा तट और मुख्य बाजार में समय-समय पर सफाई का निर्देश दिया गया था। ताकि आने वाले गंगा भक्तों को कोई परेशानी न हो।
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