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निफ्टेक ग्लोबल कंपन में निवेश करने वालों की संपत्ति की होगी जांच

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निफ्टेक ग्लोबल कंपन में निवेश करने वालों की संपत्ति की होगी जांच
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गढ़मुक्तेश्वर। बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव चांदनेर निवासी अशोक चौहान समेत पांच लोग जेल की हवा खा रहे हैं। वहीं पुलिस और क्राइम ब्रांच भी इस उलझे हुए मामले में विभिन्न बिंदुओं पर जांच में जुटी है। जो लोग रकम दोगुना करने के लालच में लाखों रुपये निफ्टेक ग्लोबल कंपनी में निवेश करते थे, अब उनकी संपत्ति की भी जांच शुरू हो गई है। पुलिस ने बताया कि जो व्यक्ति खुद की संपत्ति का सही ब्योरा पेश नहीं करेगा, उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
निफ्टेक ग्लोबल कंपनी प्रकरण के तहत गैंगस्टर एक्ट में लिप्त आरोपियों की विवेचना बहादुरगढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक सुमन कुमार सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि न्यायालय के आदेश पर कंपनी के निदेशकों समेत उनके कई एजेंटों की करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी हैं। पुलिस की विवेचना जारी है। इस मामले में पुलिस कंपनी के एजेंटों समेत निवेशकों की संपत्ति की भी जांच कर रही है। जिन लोगों ने निफ्टेक ग्लोबल कंपनी में लाखों रुपये निवेश किए थे, उनकी संपत्ति और आय के स्रोत की भी जांच होगी। यदि वह उसका सही ब्यौरा नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ भी अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर आयकर समेत अन्य विभागों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
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- रिश्तेदार और साथी भी जांच के घेरे में आए
हापुड़ क्राइम ब्रांच समेत बहादुरगढ़ पुलिस द्वारा जांच जारी है। बहादुरगढ़ पुलिस ने बताया कि अशोक चौहान के रिश्तेदार और दोस्तों की संपत्ति की जांच की जा रही है। उन्होंने इसी कंपनी के माध्यम से करोड़ों रुपये की संपत्ति हापुड़ समेत अमरोहा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा जनपदों में अर्जित की हुई है। जो करीब 18 से 20 करोड़ रुपये की है। जल्द ही जांच पूरी होने पर इस संपत्ति को भी अधिकारियों के निर्देश पर कुर्क किया जाएगा।
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- ये था मामला
निफ्टेक ग्लोबल कंपनी के निदेशक अशोक चौहान समेत अन्य आरोपी 18 माह में धन दोगुना कर लोगों को फंसाते थे। लेकिन इन लोगों की पोल खुलकर सामने तब आई, जब 2020 में कोरोना की पहली लहर आई थी। उस दौरान कंपनी द्वारा हर महीने होने वाला भुगतान बंद हो गया था। इससे लोगों को आरोपी अशोक चौहान, धर्मपाल, अशोक, सुषमा और सुनीता समेत इनके एजेंटों पर शक होने लगा था। इसके बाद लोगों ने आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराना शुरू कर दी। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद पांचों आरोपियों को 22 अक्तूबर को जयपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। जो आज भी जेल में बंद हैं।
(संवाद)
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