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ग्रामीणों ने कहा-गाजियाबाद में ही लगा लो कूड़े का प्लांट

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ग्रामीणों ने कहा-गाजियाबाद में ही लगा लो कूड़े का प्लांट
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गाजियाबाद। गालंद गांव में बनाए जा रहे डंपिंग ग्राउंड के विवाद पर मंगलवार को गाजियाबाद और हापुड़ के डीएम, नगरायुक्त और पुलिस अधिकारियों ने धरनारत ग्रामीणों से वार्ता की। नगर पालिका परिसर स्थित सीओ पिलखुवा के कार्यालय में करीब तीन घंटे चली बैठक में अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि गालंद में डंपिंग ग्राउंड नहीं, बल्कि आधुनिक मशीनों से लैस वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाया जाएगा। इससे बहुत से फायदे होंगे, इस पर ग्रामीणों ने कहा कि इतने फायदे हैं तो गाजियाबाद में प्लांट लगा लें। ग्रामीणों ने प्लांट लगाने की सहमति नहीं दी। हालांकि नगर निगम को जमीन की बाउंड्रीवाल बनाने पर सहमति दे दी है।
बैठक में नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से प्रदूषण नहीं फैलता। इसमें आधुनिक मशीनों से कूड़ा निस्तारित किया जाएगा। 50 से 60 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा, इससे क्षेत्र की बिजली की समस्या भी दूर होगी। आसपास के युवाओं को रोजगार मिलेगा। बड़ा प्लांट को लगाने में करीब दो साल लग जाएंगे। फिलहाल आप पांच एकड़ जमीन पर छोटा कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने दें। इसके बाद क्षेत्र के लोग सहमति देंगे तो बड़ा प्लांट लगाया जाएगा वरना नहीं। हापुड़ के डीएम अनुज सिंह और गाजियाबाद के डीएम राकेश कुमार सिंह ने भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने कहा कि यह प्लांट गाजियाबाद में क्यों नहीं लगाया जा रहा है। दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक चली बैठक में प्लांट लगाने पर अफसरों और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बनी। बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि प्लांट के लिए वह गांव में जाकर ग्रामीणों से बातचीत करेंगे। इसके बाद फैसला लेंगे। जमीन नगर निगम की है और यदि निगम अधिकारी उसकी बाउंड्री करना चाहते है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है।
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यह है मामला
गाजियाबाद नगर निगम की गालंद में 44.25 एकड़ भूमि है। इसी पर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित कराने की योजना है। जिसका गालंद समेत कई गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। तीन अक्तूबर से ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम दिल्ली के गाजीपुर की तरह डंपिंग ग्राउंड बनाकर यहां बीमारी फैलाना चाहता है।
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