एचपीडीए की आनंद विहार योजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में लड़ रही समिति के लिए कुछ राहत भरी खबर है। उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अधिग्रहण प्रक्रिया पर डीएम को छह सप्ताह में निर्णय कर शासन को भेजने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद में न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल व विपिन सिन्हा की खंडपीठ ने हापुड़ की वीना गुप्ता सहित 16 वादकारियों की रिट पर सुनवाई की गयी। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण बिल 1894 की प्रक्रिया में तहत 2005-06 में धारा चार और छह के नोटिफिकेशन को चैलेंज करते हुए तीस सितंबर 2013 को अपर जिलाधिकारी भू अर्जन गाजियाबाद द्वारा मुआवजा वितरण किए बिना जारी आदेश को खारिज करने का आग्रह किया था।
इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्तियों ने जिलाधिकारी से कहा कि राइट टू फेयर कंपनसेशन एडं टांसपेरेंसी एक्ट ; भूमि अर्जन व पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियन 2013 की सेक्शन की धारा पर जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 30 जनवरी 2015 में प्रदेश भर में लागू की गई है।
उसके अंतर्गत इस आदेश के प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेते हुए राज्य सरकार को अवगत कराया जाए। जिलाधिकारी अनिल ढींगरा का कहना है कि अदालत के आदेश अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही आदेश प्राप्त होंगे उसके अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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