परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पिछले महीने से ऑन लाइन टेस्ट कराए जा रहे हैं। नई प्रक्रिया में आधे अभ्यर्थी फेल हो रहे हैं, जबकि मैनुअल टेस्ट में इक्का दुक्का लोग ही फेल होते थे।
इस नई प्रणाली का लाभ भी दलालों को मिल रहा है। वह फेल अभ्यर्थियों को पास कराने के एवज में वसूली कर रहे हैं। परिवहन कार्यालय में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को हाईटेक और पारदर्शी करने के लिए सरकार ने 16 अगस्त से ऑन लाइन टेस्ट प्रक्रिया शुरू की थी।
अभ्यर्थियों में इस प्रक्रिया को लेकर काफी उत्साह था। यह प्रक्रिया लागू होने के बाद लोगों को समझ नहीं आ रही है। इसका कारण यह है कि कंप्यूटर पर वह परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं। इस कारण परीक्षा में लगभग आधे अभ्यर्थी फेल हो रहे हैं।
हालांकि इन्हें सप्ताह भर बाद फिर टेस्ट देने का मौका दिया जा रहा है। कुल मिलाकर अभ्यर्थियों को ऐसे चार मौके दिए जाएंगे, लेकिन लोगों के पास इतना समय नहीं है और झंझट से बचने के लिए वह दलालों का सहारा ले रहे हैं।
दलाल इन लाइसेंस को आठ सौ से हजार रुपये लेकर आराम से बनवा रहे हैं। इसके अलावा दूसरे कार्यों के एवज में भी जमकर दलाली हो रही है।
एआरटीओ प्रशासन एनपी सिंह का कहना है कि नई प्रक्रिया लागू होने से लोगों को टेस्ट में फेल होने जैसी दिक्कत जरूर आ रही है। इसके लिए उनके पास कई मौके हैं। अब दलालों का हस्तक्षेप कतई नहीं है।
शिवपुरी निवासी सचिन ने बताया कि दस दिन पहले ऑन लाइन टेस्ट दिया था। समस्या ये थी कि टेस्ट समय से पहले शुरू हो गया था और उसे बीच में ही बिठा दिया गया। जिससे वह फेल हो गया। फेल होने के बाद दलालों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया।
मजीदपुरा निवासी आबिद ने बताया कि ऑन लाइन टेस्ट में पूरा सिस्टम अलग हो गया है। जब वह टेस्ट देने पहुंचा तो कुछ समझ नहीं आया। इससे अच्छा होता है कि पेपर पर ही टेस्ट हो जाता। अधिकर लोग टेस्ट के दौरान सिर खुजा रहे थे।