जिले का एक गांव ऐसा भी है, जो वहां से गुजर रही सड़क को देखना भी पसंद नहीं करता। कारण छह महीने में यह खूनी सड़क सरावनी गांव के सात लोगों को निगल चुकी है। फर्राटा भर दौड़ते वाहनों की चपेट में आने से यह हादसे हुए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रशासनिक अफसरों को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश मिले हैं। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीणों को खून के आंसू रुला रही है। हापुड़ से किठौर को जोड़ने वाली सड़क पर 10 हजार की आबादी वाला गांव सरावनी पड़ता है।
करीब डेढ किलोमीटर तक यह गांव सड़क किनारे पर बसा हुआ है। मुख्यत: स्कूल, बाजार भी सड़क के किनारे हैं। प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी से यहां यातायात का कोई नियम नहीं चलता। गांव से तीन किलोमीटर की दूरी तक कोई रोड ब्रेकर नहीं है। इससे यहां फर्राटा भरकर वाहन दौड़ते हैं।
सड़क पर गांव बसा होने के कारण लोग काम पड़ने पर सड़क के आरपार जाते रहते हैं। छह महीने में गौर करें तो फर्राटा भरते वाहनों की चपेट में आकर सात लोग दम तोड़ चुके हैं। भयभीत ग्रामीण इस सड़क का नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझते।
गांव के विकास को समर्पित गुरमीत कौर परम जन सेवा संस्था के कार्यकर्ता गुरमीत ने ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रशासनिक अफसरों से लेकर शासन को मामले से अवगत करा, ब्रेकर और यातायात पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की मांग उठा चुका हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रशासनिक अफसरों को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश मिल चुके हैं। फिर भी अफसर लापरवाह बने हैं। अफसरों की इस उदासीनता से ग्रामीण खून के आंसू बहा रहे हैं।
छह महीने में फर्राटा भरते वाहनों की चपेट में आकर गांव निवासी 28 वर्षीय काले, 35 वर्षीय बागेजहां व उसका दो वर्षीय पुत्र बिलाल, 30 वर्षीय रहीस व उसका 8 वर्षीय बच्चा, सात वर्षीय जिसान, व नाजिम का पुत्र दम तोड़ चुका है।
एसडीएम मीनू राणा का कहना है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करके समस्या का समाधान कराया जाएगा।