पिलखुवा। आजादी की जंग में धौलाना के क्रांतिकारियों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। जब पूरे भारत में फिरंगियों के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही थी तब धौलाना के क्रांतिकारियों ने धौलाना थाना फूंककर अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था। थाना फूंके जाने की गूंज लंदन तक पहुंची थी। इसके बाद अंग्रेजों ने धौलाना में 14 क्रांतिकारियों को फांसी दी थी। इतना ही नहीं अंग्रेजों ने 14 कुत्तों को भी गोलियों से भून यह संदेश देने की कोशिश की थी कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने वालों का यही हाल किया जाएगा।
10 मई 1857 को मेरठ में क्रांति का बिगुल बजने के बाद धौलाना में राजपूतों की बैठकें होनी शुरू हो गई थी। जंगे आजादी में भागीदारी निभाते हुए धौलाना के क्रांतिकारियों ने मिट्टी का तेल छिड़ककर धौलाना थाना फूंक दिया था। तब थानेदार मुबारक अली ने बिटोरे में छिपकर जान बचाई थी। दूसरे दिन कलक्टर डनलप को थाना फूंके जाने की खबर दी गई थी। इसकी गूंज लंदन तक पहुंची और अंग्रेजी अफसर भड़क गए। बाद में अंग्रेजों की फौज तोपों के साथ धौलाना पहुंची थाना फूंकने वालों की सूची तैयार की गई। इसमें 13 राजपूत मक्खन सिंह गहलौत, चंदन सिंह, जीराज सिंह, दौलत सिंह, सुमेर सिंह, साहब सिंह, किड्ढा सिंह, महाराज सिंह, दुर्गा सिंह, जीया सिंह, मसाव सिंह, वजीर सिंह, और झनकूमल सिंहल का नाम सामने आया। अंग्रेजों ने इन चौदह लोगों को पीपल के पेड़ पर फांसी दी। इसके बाद 19 नवंबर 1857 को धौलाना की जमीन जब्त कर ग्रामीणों को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया था।