फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब टूटने लगा है गन्ना किसानों के सब्र का बांध

विज्ञापन
विज्ञापन
हापुड़। चीनी मिलों का पेेराई सत्र शुरू होने में देरी और प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने का समर्थन मूल्य अब तक घोषित नहीं करने से गन्ना किसानों के सब्र का बांध टूटनेे लगा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मेरठ आगमन पर भी गन्ना मूल्य पर मुंह नहीं खोलने से किसान गुस्से में हैं।
विज्ञापन

दरअसल, पिछले सीजन में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने सीजन के प्रारंभ में ही 50 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य बढ़ाकर गन्ना किसानों को भारी राहत दे दी थी। ऐसे में अब सपा सरकार के सामने गन्ने का मूल्य सरकार के गले की फांस बन गया है, क्योंकि किसानों की मसीहा होने का दावा करने वाले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अगर गन्ना मूल्य पिछले सीजन के मुकाबले कम बढ़ाया तो किसानों के बीच उनकी किरकिरी हो जाएगी। माना जा रहा है कि इसी कारण सरकार की मंशा है कि पहले चीनी मिलें चलें, तभी गन्ना मूल्य घोषित किया जाए क्योंकि एक बार पेराई सत्र शुरू होने पर चीनी मिलों को कम से कम 90 दिन का पेराई सत्र पूरा करना होगा। ऐसे में किसान मारा जा रहा है। बिना मूल्य घोषित हुए चीनी मिलों के पेराई सत्र शुरू करने पर भी उपापोह की स्थिति है। इसी कारण किसानों के धैर्य का बांध टूट रहा है।
गन्ना उत्पादक किसान आदेश चौधरी का कहना है कि बड़े दुख की बात यह है कि उद्यमी अपना माल तैयार कर स्वयं उत्पाद पर मूल्य प्रिंट करता है जबकि किसान तमाम लागत लगाने के बाद गन्ना मूल्य घोषित करने के लिए सरकार की ओर मुंह उठाकर देखता है। उन्होंने कहा कि अगर गन्ना मूल्य घोषित होने में विलंब हुआ तो किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ सकता है। एक अन्य किसान नेता शिवकुमार त्यागी का कहना है कि सरकार गन्ना किसानों का दर्द नहीं समझ रही। इसी कारण किसानों में आक्रोश फैल रहा है। अगर यही हालात रहे तो किसान आंदोलन शुरू करने पर मजबूर हो जाएंगे। वहीं, गुड़ चीनी के कारोबार के विशेषज्ञ पंकज अग्रवाल का मानना है कि इस सीजन में सरकार गन्ना मूल्य मे कम से कम 50 रुपये क्विंटल की बढ़ोत्तरी कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें