जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में गढ़ विधायक कमल सिंह मलिक के प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया कि सभी सदस्य गढ़ गंगा मेले को प्रदेश मानचित्र पर लाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजेंगे।
बैठक में निर्माण कार्य में धांधली, निर्माण की गुणवत्ता और बिना सदस्य को जानकारी दिए उसके वार्ड में कार्य कराये जाने के संबंध में हंगामे के बीच कुल 27 करोड़ 10 लाख रुपये के प्रस्ताव पास हो गए। हालांकि बैठक में बड़े हंगामे की आशंका को लेकर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
जिला पंचायत सभागार में अध्यक्ष रजनी लता खटीक की अध्यक्षता में बैठक में नवनिर्वाचित तीनों विधायक पूरी फार्म में दिखाई दिए। हापुड़ विधायक विजयपाल आढ़ती ने जिला पंचायत में चली आ रही धांधलियों को
तत्काल बंद करने के निर्देश देते हुए कहा कि बिना सभी सदस्यों की सहमति के उनके वार्ड में विकास कार्य नहीं कराये जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से जिला पंचायत की संपत्तियों, पूर्व में कराए गए कार्यों और पूर्व साल की कार्य योजना का ब्यौरा मांगा।
गढ़ विधायक कमल सिंह मलिक ने कहा कि गढ़ गंगा मेले को मानचित्र पर लाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जिसका सभी सदस्यों ने स्वागत किया। धौलाना विधायक असलम चौधरी ने छोटे दुकानदारों को कर मुक्त करने के लिए प्रस्ताव रखा।
बैठक के दौरान हापुड़ विधायक विजयपाल सिंह ने यहां मौजूद बीएसए और एसीएमओ को फटकार लगायी। तीनों ही विधायकों की शिकायत थी कि बीएसए किसी का फोन ही नहीं उठाते।
बैठक में सदस्य नरेंद्र मावी ने कहा कि कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है कि वार्ड में कराये जा रहे किसी भी कार्य की जानकारी सदस्य को होनी चाहिए। कृष्णकांत हूण ने कहा कि यह किसी को भी जानकारी नहीं है कि कौन से विभाग की कौन सी कमेटी बनायी गयी है।
अमृता कुमार ने पूछा कि जिला पंचायत कार्यालय के बाहर विवादित निर्माण के बारे में पूरा ब्यौरा मांगा। उन्होंने चतुर्थ राज्य वित्त आयोग अनुदान के सापेक्ष में 2017-18 के लिए प्रस्तावित कार्य योजना स्वीकृति पर विचार के प्रस्ताव हैं, जो सरासर गलत है, क्योंकि अभी शासन द्वारा कोई वित्त सहायता नहीं आयी है।
बैठक में कर निर्धारण के लिए कमेटी बनाने पर भी सहमति बनी। कुल मिलाकर हंगामे के बीच 2017-18 के लिए 27 करोड़ 10 लाख 47 हजार 293 रुपये के एजेंडे में शामिल 10 प्रस्ताव पास हो गए।
इसके अलावा वर्ष 2016-17 का 34 करोड़ 12 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट भी पास हो गया। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बोर्ड बैठक में बड़े हंगामे की आशंका के चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन बैठक में इसकी आवश्यकता नहीं पड़ी।