राजकीय महिला अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता को 102 एंबुलेंस सेवा की सुविधा नहीं मिल सकी। काफी देर तक इंतजार करने के बाद प्रसूता को परिजन सीएमओ कार्यालय के सामने ही ऑटो से लेकर घर गए।
घटना के बाद से 102 नंबर सेवा पर सवालिया निशान लग गया है। वहीं, सीएमओ ने प्रसूता को मर्जी से घर ले जाने और एंबुलेंस सेवा को कॉल नहीं करने की बात कही है। जबकि, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से घर 102 एंबुलेंस सेवा से भेजे जाने का नियम है।
गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान परेशानी न हो व जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर 102 नंबर एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। हापुड़ को भी 10 एंबुलेंस इस योजना के तहत मिली थी।
शुक्रवार को कोठीगेट स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय पर गांव भिकनपुर निवासी प्रसूता सबीना घंटों एंबुलेंस के आने का इंतजार करती रही। उसने कई बार चिकित्सकों से भी एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन किसी चिकित्सक और कर्मचारी ने उसकी बातों नहीं सुनी।
खास बात यह है कि राजकीय महिला चिकित्सालय में ही सीएमओ का कार्यालय भी है। इसके बावजूद डॉक्टर और कर्मचारियों ने कोई सुध नहीं ली। सबीना के परिजन आसमीन ने बताया कि बृहस्पतिवार को राजकीय महिला चिकित्सालय में सबीना का प्रसव हुआ था।
कई बार चिकित्सकों से एंबलुेंस की व्यवस्था करने की गुहार उन्होंने लगाई। घंटों बाद भी एंबुलेंस नहीं आ सकी। मजबूरी में प्रसूता को ऑटो से गांव ले आना पड़ा। रास्ते में काफी गड्ढे होने के कारण उसे बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं, एंबुलेंस कर्मियों का कहना था कि इस संबंध में कोई कॉल दर्ज नहीं कराई गई थी, जिसके चलते उन्हें मामले की जानकारी नहीं हुई। सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि प्रसव के बाद मरीज को 48 घंटे तक ऑब्जर्वेशन में रखना होता है।
मरीज से कुछ देर इंतजार करने के लिए बोला गया था। उसके परिजन अपनी इच्छा से थ्री व्हीलर से उसे घर ले गए। उन्होंने एंबुलेंस को कॉल भी नहीं की।