हमीरपुर। देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से मुक्त कराने का प्रधानमंत्री का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। ब्लॉक स्तर पर ही नहीं जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में भी टीबी की दवाओं का टोटा है।
इससे मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। हालांकि दवाओं की किल्लत को देखते हुए सीएमओ ने सीपी व आईपी दवाएं स्थानीय स्तर पर खरीदी हैं। वहीं दोनों सीएमएस को भी दवाएं मंगाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज करा रहे करीब 763 टीबी मरीजों की मुश्किलें पिछले दो माह से बनी हुई हैं। टीबी इलाज में प्रयोग होने वाली कई प्रमुख दवाएं साइक्लोसीरिन, क्लोफाजीमिन, लीनोजॉलिट व पैराडॉबसिन आदि दवाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं।
यह हाल तब है जब 2019 से क्षयरोग मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते शासन स्तर से लोकल में ही दवा खरीदकर उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि सीएमओ ने सीपी 5600 व आईपी की 6600 दवाएं क्रय कर टीबी अस्पतालों में उपलब्ध कराई हैं। साथ ही जिला अस्पताल के दोनों सीएमएस को भी दवा खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार से दवा की आपूर्ति की जाती है। आपूर्ति न आने से दवाओं की किल्लत हुई है। राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि दवाओं की लोकल स्तर पर खरीद की जाए। इतना बजट नहीं है कि एक साथ दवाएं खरीदी जाएं। यही कारण है कि थोड़ी-थोड़ी दवा खरीद कर मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। - डॉ. गीतम सिंह, सीएमओ