हमीरपुर। कालपी चौराहे पर करीब 10 वर्षों से फल बेचकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले राजकुमार निषाद उर्फ राजू की मौत के बाद सोमवार को माहौल बदल गया। जिस चौराहे पर वह रोजी रोटी कमाते थे, वहीं उनका शव पहुंचने पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। परिजन ने सड़क पर शव रख यातायात बाधित कर दिया। प्रदर्शन के दौरान वाहनों की लंबी कतार लग गईं। जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। पुलिस ने उसे वैकल्पिक रास्ते से निकलवाया।
राजू की मां राजकुमारी इसी चौराहे पर वर्षों से सब्जी बेच रही हैं। घटना के दिन वह बेटे से महज दस फीट की दूरी पर थीं।
चौराहे पर बढ़ती रही भीड़
सोमवार दोपहर करीब 3:36 बजे प्राइवेट एंबुलेंस से शव पहुंचने के बाद कालपी चौराहे पर भीड़ बढ़ती गई। अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार, सीओ यातायात मंजू पांडे, सदर सीओ यशपाल सिंह, सीओ मौदहा राजकुमार पांडेय, सदर कोतवाल सहित महिला पुलिसकर्मियों और एक बटालियन पीएसी तैनात रही। करीब तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहने के बाद शाम 6:10 बजे जाम खुला।
महिला को कोतवाली ले गई पुलिस
मृतक के बेटे सतेंद्र द्वारा एक महिला के साथ मारपीट करने का मामला भी सामने आया, जो चिल्ला-चिल्लाकर उस महिला पर पिता की हत्या कराए जाने का आरोप लगा रहा था। हालांकि मारपीट की परिस्थितियों और महिला को कोतवाली ले जाने की वजह की सही जानकारी सामने नहीं आई। अपर एसपी ने इस मामले को जांच के दायरे में बताया है। घटना को राजू की मौत से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
परिवर के सामने आजीविका का संकट
राजू के परिवार में पत्नी सरोज और चार बेटे सत्येंद्र (19), पुष्पेंद्र (17), बाबू (12) और निखिल (10) हैं। वह घर का मुख्य कमाने वाला सदस्य था। मौत के बाद पत्नी और बच्चों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
ब्रेन हैमरेज की जताई थी आशंका
चचेरे भाई सुनील कुमार के मुताबिक चिकित्सक ने ब्रेन हैमरेज की आशंका जताते हुए करीब 20 मिनट के भीतर कानपुर रेफर कर दिया था। एमआरआई जांच व पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में सिर पर गोली लगने की पुष्टि हुई।