सूखे और विभागीय हीलाहवाली से परेशान किसानों को मंगलवार को हुई बारिश ने राहत दी। कुछ स्थानों पर जोरदार बारिश हुई तो कहीं रिमझिम। किसानों का कहना है कि ये पानी अमृत है। अब गेहूं की फसल में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे परती पड़े खेतों में बुआई भी कर सकेंगे।
इस बार रबी अभियान के दौरान बारिश न होने से ज्यादातर किसानों की जमीन परती पड़ी है। नहरों में पानी न होेने और राजकीय नलकूपों का संचालन न होने से किसानों की समस्या और बढ़ गई। ऐसे में मंगलवार को हुई बारिश किसानों के लिए संजीवनी बनकर आई। खेतों में मुरझा रही फसलों में जान आ गई है।
सरीला तहसील के खजुरी निवासी कमल सिंह ने बताया कि उनके गांव सहित आसपास के इलाके में जोरदार बारिश हुई। अब गेहूं की फसल में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुरारा के प्रगतिशील किसान गिरीश पालीवाल ने कहा कि बारिश से फसलों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। क्षेत्र में रिमझिम बारिश हुई है।
इससे दलहन चना, मसूर, मटर और सरसों की फसल में फायदा होगा। उधर भरुआसुमेरपुर में भी रुक रुक कर बारिश हुई। पंधरी के किसान नवीन सिंह, टेढ़ा के गोपीश्याम द्विवेदी, सौरभ सिंह, ममता सिंह आदि ने कहा कि अगर थोड़ी और बारिश हो जाए तो परती पड़ी जमीन में जान आ जाए। वहीं सरीला प्रतिनिधि के अनुसार कस्बा सहित पूरे क्षेत्र में देर शाम तक बारिश जारी रही।
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डा. एसके राय ने कहा कि बरसात होने से खेत में बीज का जमाव हो जाएगा। जहां बारिश अच्छी हुई है, वहां फसलों में उत्पादन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी बादल छाए हैं। आगे भी बरसात की संभावना है। कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी बीडी प्रजापति ने बताया कि बारिश से फसलों को लाभ मिलेगा।