गोहांड (हमीरपुर)। उरई मार्ग पर बेतवा नदी पर बने चिकासी-मोहाना पुल की स्लैब पांच माह में तीसरी बार उखड़ने लगी है। मार्च में 1.54 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल पर मरम्मत कार्य हुआ था। बार-बार स्लैब उखड़ने से कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह पुल हमीरपुर व जालौन जनपद को जोड़ता है। इसका निर्माण वर्ष 1983 में हुआ था। प्रतिदिन करीब बीस हजार से अधिक वाहनों और लगभग एक लाख लोगों का आवागमन इस पुल से होता है। करीब पांच लाख की आबादी इस पुल पर निर्भर है। रखरखाव के अभाव में पुल जर्जर हो गया था। अमर उजाला ने 2 अक्तूबर 2025 के अंक में इसकी दुर्दशा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद विभाग ने पुल की मरम्मत का काम शुरू किया।
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पुल की मरम्मत 5 फरवरी से 16 मार्च तक चली थी। इस दौरान पुल से आवागमन 40 दिन तक ठप रहा। मरम्मत में क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक किया गया, एक्सपेंशन जॉइंट बदले गए और सतह को मजबूत किया गया। आवागमन ठप होने से करीब पचास गांव की डेढ़ लाख आबादी प्रभावित हुई थी। 17 मार्च से पुल पर आवागमन बहाल हुआ था। जून व अगस्त माह में स्लैब उखड़ने पर विभाग ने मरम्मत कराई थी। बुधवार को एक बार फिर पुल की स्लैब उखड़ने लगी जिससे सरिया दिख रहे हैं।
50 साल पुराना है पुल, स्लैब के बाद निकली सरिया: राठ उरई मार्ग पर स्थित यह पुल वर्ष 1973 में बनना शुरू हुआ था और वर्ष 1983 में तैयार हुआ। पुल की लंबाई 699 मीटर और चौड़ाई 7.5 मीटर है। बीते वर्षों में केवल सीमित मरम्मत हुई जिससे पुल की सतह खराब होती चली गई थी। कई स्थानों पर गड्ढे और सरिया बाहर निकल आए हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। मार्च माह में स्लैब डाली गई थी। पांच माह बाद अब फिर से सरिया दिखने लगी है जिससे हादसों की आशंका जताई जा रही है।