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स्वामी ब्रह्मानंद याद रहे, भुला दी उनकी सीख

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राठ। परिवार का मोह त्याग जंगे आजादी में कूदने वाले स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज ने आजादी के बाद राष्ट्रनिर्माण व गोसंरक्षण में अहम भूमिका निभाई। शिक्षा की अलख जगाने के लिए विशाल शिक्षण संस्थान की नींव रखी। ऐसे त्यागी महात्मा के नाम पर राजनीति चमकाने के बाद उनकी सुध नहीं ली जाती है।
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स्वामी ब्रह्मानंद का जन्म सरीला क्षेत्र के छोटे से गांव बरहरा में 4 दिसंबर 1894 में हुआ था। वह स्वाधीनता संग्राम में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू तथा गणेश शंकर विद्यार्थी के निकट संपर्क में रहे। अंग्रजों से संघर्ष करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक कानून तोड़ने एवं रियासतों के मुक्ति आंदोलनों में अनेकों बार जेल यात्राएं कीं। तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि तथा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निकट सहयोगी रहे। साल 1938 में ब्रह्मानंद इंटर कालेज, 1943 में ब्रह्मानंद संस्कृत महाविद्यालय तथा 1960 में ब्रह्मानंद महाविद्यालय की नींव रखी। खुद एक कुटिया में जीवन गुजार सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन व पेंशन शिक्षण संस्थान को दान कर दी थी। दो बार सांसद रहने के बावजूद कभी पैसे को हाथ से नहीं छुआ। शिक्षण संस्थान में अपने परिवार के किसी भी सदस्य को दखलंदाजी करने पर सख्त पाबंदी लगा रखी थी।
समारोह में आएंगी पूर्व मुख्यमंत्री
राठ। क्रातिकारी संत स्वामी ब्रह्मानंद जी का 127 वां जन्मोत्सव समारोह ब्रह्मानंद शिक्षण संस्थान में मनाया जा रहा है। डिग्री कालेज के प्राचार्य डॉ.एसएल पाल ने बताया कि शनिवार दोपहर 12 बजे समाधि स्थल पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती व लोक निर्माण राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय अतिथि रहेंगे। वहीं इंटर कालेज के प्रधानाचार्य नरेशचंद्र आर्य ने बताया कि लोधी राजपूत छात्रावास में सम्मान समारोह व लोकार्पण कार्यक्रम होगा। जिसमें मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री सहकारिता एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय भारत सरकार बीएल वर्मा रहेंगे। संवाद
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