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यूरिया खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं किसान

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मौदहा की किसान सेवा समिति में लटकता ताला। संवाद - फोटो : HAMIRPUR
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मौदहा। खाद की किल्लत से किसान बेहाल हैं। रोज सुबह क्षेत्रीय समितियों क्रय विक्रय व पीसीएफ खाद बिक्री केंद्र के चक्कर लगाकर लौटने वाले किसान अब अव्यवस्था के चलते टूटते जा रहे है।
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जहां समिति के जिम्मेदार खरीद केंद्र प्रभारी को यह भी पता नहीं कि अब कब तक खाद आएगी। वहीं बाजार में महंगे दामों में खाद की बिक्री के साथ ही उन्हें अच्छी कंपनी की खाद होने का विश्वास नहीं हो पा रहा है। सोमवार को क्रय विक्रय सहित पीसीएफ केंद्र में खाद लेने के लिए दूर दराज से किसान ट्रैक्टरों के साथ इनके चक्कर लगाकर लौट गए।
किसान सेवा समिति के सचिव अवनीश कुमार ने बताया कि उनके पास किसी प्रकार की खाद नहीं है। न ही वह बता सकते हैं कि खाद कब आएगी। रैक महोबा आने पर ही पता चल सकेगा कि खाद कब आएगी। इसी तरह क्रय विक्रय समिति के सचिव बालकृष्ण सिंह ने कहा कि जब तक खाद रही, वितरित की गई। किसान रोज आते हैं, पूछते हैं खाद कब आएगी। खाद आने पर दी जाएगी।
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बोले किसान
फोटो 29 एचएएमपी 21 राजनारायन।
भवानी निवासी राजनारायन ने बताया कि दस बीघा खेत में गेहूं फसल में पहला पानी लगाया है। अब यूरिया की आवश्यकता है। बाजार में 350 रुपये प्रति बोरी यूरिया बिक रही है। बाजार की खाद पर विश्वास नहीं है। जबकि इफ्को की 266.50 रुपये प्रति बोरी दर है। उसमें शत प्रतिशत शुद्धता का विश्वास है।
फोटो 29 एचएएमपी 22 राधा दीक्षित।
अरतरा की महिला किसान राधा दीक्षित ने बताया कि उनके पिता वृद्ध हैं और भाई छोटा है। इसलिए वह मां के साथ स्वयं खाद लेने आई हैं। क्रय विक्रय समिति में न कोई जिम्मेदार मिला और न ही खाद मिली। सुबह से बैठने के बाद वह देर शाम घर जा रहे हैं।
फोटो 29 एचएएमपी 23 भगवानदीन।
रीवन के भगवानदीन रामजी के साथ ट्रैक्टर ट्राली लेकर खाद लेने आए। कहा उन्हें यूरिया व डीएपी की जरूरत है। ट्रैक्टर लेकर एक बार आने में करीब दो सौ रुपये बर्बाद होते हैं। लेकिन खाद मिलना तो दूर केंद्रों में सन्नाटा छाया है। कर्मचारियों का अता पता नहीं है।
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