हमीरपुर। वर्ष 1989 में कांग्रेस से विधायक बनने के बाद युवराज सिंह विधानसभा पहुंच चुके हैं तो दूसरी बार सपा से बांदा-हमीरपुर निकाय क्षेत्र से 2003 से 2010 तक एमएलसी रहकर विधान परिषद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सपा से कई बार विधानसभा के लिए टिकट की दावेदारी की। पार्टी से हुए मनमुटाव के बीच वह सपा छोड़ भाजपा में चले गए। भाजपा में कम समय में ही उन्होंने अपनी अच्छी पैठ बना ली। सदर विधानसभा में हुए उपचुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी बनाया। जिस पर उन्होंने जीत हासिल की।
मौदहा विकासखंड के इचौली गांव निवासी 62 वर्षीय युवराज सिंह व उनके परिवार का राजनीति से पुराना रिश्ता है। उनके पिता स्व. बृजराज सिंह मौदहा विधानसभा से वर्ष 1962 व 1996 में विधायक रह चुके हैं। साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री भी रहे। युवराज के बाबा चौधरी पहलवान सिंह बांदा से विधायक रह चुके हैं। इनके ताऊ स्व. महिरजध्वज सिंह विधायक व एमएलसी रहे हैं।
चाचा जयवंत सिंह एमएलसी, भाई कुशजध्वज सिंह बांदा हमीरपुर से एमएलसी रहे हैं। युवराज सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कांग्रेस से की और वर्ष 1989 में विधायक बने। इसके बाद वह 1991 व 1993 में कांग्रेस व 1096 में सपा से विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली। 2003 में हमीरपुर बांदा निकाय क्षेत्र से एमएलसी चुने गए। इस दल में उपेक्षा होने पर करीब चार वर्ष पूर्व युवराज ने भाजपा ज्वाइन कर ली।
मौजूदा में वह भाजपा में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य है। इधर विधानसभा के उपचुनाव का बिगुल बजने पर युवराज सिंह ने टिकट की दावेदारी की। टिकट के लिए पार्टी में काफी लंबी सूची होने पर उन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ी। पार्टी ने भी उस वक्त टिकट की घोषणा की जब नामांकन का सिर्फ एक दिन यानी तीन सितंबर को टिकट फाइनल हुआ। नामांकन के अंतिम दिन चार सितंबर को नामांकन कर चुनाव मैदान में कूद गए। जहां रात दिन प्रचार कर चुनाव में जीत हासिल की।
उपचुनाव में जीत का अंतर हुआ कम
हमीरपुर। वर्ष 2017 में सदर विधानसभा से भाजपा से विधायक बने अशोक सिंह चंदेल को 110688 मत मिले थे। जबकि दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी रहे डा. मनोज प्रजापति को 62233 मत, बसपा से संजय दीक्षित को 60543 मत व निषाद पार्टी से चुनाव लड़े एनुददीन मौलाना को 8513 मत मिले थे। इस चुनाव में अशोक चंदेल ने 48455 मतों से जीत हासिल की थी। उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी युवराज सिंह की जीत का अंतर कम रहा है। युवराज करीब 17867 मतों से विजयी रहे। उपचुनाव में भी सपा से प्रत्याशी रहे डा. मनोज प्रजापति इस बार भी दूसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। हालांकि उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत 48.10 रहा। जबकि 2017 में 63.34 फीसदी मतदान हुआ था।
विधायक को उम्रकैद पर हुआ चुनाव
हमीरपुर। सदर विधानसभा में दो बार उपचुनाव हुआ है। वर्ष 2017 में भाजपा से अशोक सिंह चंदेल सदर विधान सभा से विधायक बने। लेकिन सामूहिक हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट से चंदेल को उम्रकैद की सजा हो गई। इस पर उनकी सदस्यता चली गई। जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने इस सीट के लिए दोबारा उपचुनाव कराया।
जीत के प्रति आश्वस्त सपाइयों को लगा झटका
भरुआसुमेरपुर। 2014 में हुए उपचुनाव में जीत का परचम फहरा चुकी सपा इस बार अपनी जीत पक्का मान रही थी। इसी के चलते मंडी समिति के नीलामी चबूतरे में सपा प्रत्याशी डा. मनोज प्रजापति अपने समर्थकों के साथ किसी भी गड़बड़ी को देखते पिछले 23 सितंबर से लगातार डेरा डाले रहे, लेकिन शुक्रवार को आखिरी राउंड आने पर अपनी हार देखते सपा प्रत्याशी खिसक गए। पिछले 2017 में चुनाव सपा से चुनाव लड़ चुके सपा प्रत्याशी ने 61933 वोट मिले थे। इस बार भी सपाई उम्मीद से ज्यादा उत्साहित थे। लेकिन मतों की गिनती ने उन्हें निराश कर दिया।