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पत्नी की गैर मौजूदगी में बच्चों को ले आया था अमर, तीनों शवों के अंतिम संस्कार में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़, घरों में नहीं जले चूल्हे

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दरवाजे पर खड़ी मृतक की पत्नी लक्ष्मी। - फोटो : HAMIRPUR
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मौदहा (हमीरपुर)। भवानी गांव के अलीपुरा मजरा में मंगलवार को हुई घटना के बाद देर रात जब तीनों शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। इसी बीच मृतक अमर सिंह की पत्नी लक्ष्मी भी मायके से आ गई थी। वह बेटा-बेटी व पति का शव देखकर अचेत हो गई।
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बुधवार सुबह करीब 10 बजे तीनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। लक्ष्मी ने रो रोकर कह कि वह मजदूरी कर परिवार चला लेती। लेकिन मना करने के बाद भी उसकी गैर मौजूदगी में पति बच्चों को लेकर चला आया। उसे किसी अनहोनी की आशंका थी।
अलीपुरा मजरा निवासी अमरसिंह (35) नशे की लत व आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पिछले वर्ष सड़क दुर्घटना में वह एक पैर से दिव्यांग हो गया था। उसके इलाज में पिता को उसके हिस्से की चार बीघा जमीन भी बेचनी पड़ी थी। दिव्यांग होने के कारण अमर सिंह के सामने परिवार पालने की समस्या थी। गांव आई उसकी पत्नी लक्ष्मी ने बताया आर्थिक तंगी के चलते वह अपने पति व बच्चों के साथ लेकर मायके चली गई थी।
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13 मार्च को उसके पति ने उससे कहा कि यहां उनका भरण पोषण नहीं हो पा रहा है। इसलिए वह उसके साथ चल कर कबरई के एक होटल में रह उसके साथ काम करे। जिस पर उसने कहा कि वह होटल में रहकर किसी कीमत में काम नहीं करेगी। कहा वह होटल में काम करे और वह बच्चों सहित गांव में रह कर मजदूरी कर लेगी। बताया मौजूदा समय में वह अपने मायके में परिवार के भरण पोषण के लिए फसल की कटाई कर रही थी।
जिसके चलते उसने पति के साथ जाने को मना कर दिया था। इस बात से नाराज अमर सिंह उसकी गैर मौजूदगी में बिना बताए मासूम पुत्र प्रांशू व पुत्री प्रियांशी को लेकर अलीपुरा आ गया। बताया 16 मार्च की रात करीब 11 बजे उसकी पति अमर सिंह से फोन पर बात हुई। तब उसने कहा था कि प्रियांशी की तबियत ठीक नहीं है। कहा अगले दिन 17 मार्च की सुबह उसे इस घटना की सूचना फोन से मिली। कहा उसका सब कुछ लुट गया। बुधवार को भी गांव के कई घरों में चूल्हे नहीं जले।
लक्ष्मी को मिलेगी 30 हजार की मदद
अमर सिंह के आत्महत्या व दोनों बच्चों की हत्या करने के मामले में पुलिस अधिकारियों के साथ एसडीएम अजीत परेश ने स्थिति का जायजा लिया और मृतक की पत्नी लक्ष्मी को पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार रुपये दिए जाने के निर्देश लेखपाल को दिए। मृतक अमर सिंह को बंटवारे में पिता से दो बीघे जमीन मिली थी। उसकी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने पर उसके इलाज के लिए पिता ने यह जमीन बेचकर उसके इलाज में लगा दिया था। जिससे अमरसिंह भूमिहीन हो गया।
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