फोटो 16 एचएएमपी 33- शेर प्रस्तुत करती शायर हिमांशी बाबरा। संवाद
मौदहा (हमीरपुर)। नगर में शिक्षा की अलख जलाने वाले मौलाना सलीम जाफरी की याद में अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। शायरों ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से समां बांध दिया तथा श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। मेरठ से आई शायर हिमांशी बाबरा ने दिल ऐसे मुब्तिला हुआ तेरे मलाल में, जुल्फें सफेद हो गई उन्नीस साल में.. शेर पढ़ा तो पंडाल तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत शायर राही बस्तवी ने नाते-रसूल पढ़कर की। इसके बाद नगर के शायर मसीह निज़ामी ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। मशहूर मजाहिया शायर ज़ीरो बांदवी ने अपने खास अंदाज़ से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हाशिम फिरोज़ाबादी ने जज़्बाती कलाम पेश करते हुए पढ़ा रिसालत पे जब बात आई तो सुन लो…पर खूब तालियां बजी। शायर आरिफ़ सैफ़ी की पंक्तियों मतलब के है यार दिलों के काले हैं…को भी श्रोताओं ने पसंद किया। इसी क्रम में शायरा अंजुम रहबर ने अपना मशहूर कलाम एक सांवली सी लड़की… पढ़ा तो सभी ने सराहना की। महोबा से आए हफीज़ कमाल ने पारिवारिक सरोकारों पर आधारित अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। खुर्शीद हैदर ने भी अपनी उत्कृष्ट शायरी से कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। कार्यक्रम का संचालन मारूफ खान ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमरूद्दीन ने कहा कि ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा पर जोर दिया। आयोजक निज़ामुद्दीन ने सभी का आभार व्यक्त किया।