जखेला गांव में धान की रोपाई के लिए प्राइवेट नलकूप से पलेवा करते किसान।
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हमीरपुर । आषाढ़ में ज्येष्ठ जैसी चटक धूप और गर्मी के कारण लोग घरों से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। पेट दर्द, उल्टी, दस्त का प्रकोप बढ़ रहा है। किसान खरीफ फसलें ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, तिल की बुआई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इससे फसलें पिछड़ने का भय किसानों को सता रहा है। प्राइवेट नलकूपों से पानी लेकर पलेवा करने के लिए किसान मजबूर है।
सुमेरपुर के पत्योरा गांव निवासी किसान भूपेंद्र निषाद ने बताया कि बारिश न होने से नहरों में पानी नहीं है। राजकीय नलकूप भी ठप हैं। बारिश न होने पर हर तीसरे दिन केले की फसल में निजी नलकूप से पानी लगाना पड़ता है। धान की नर्सरी सूख गई है। कुरारा के जखेला गांव निवासी जीतेंद्र सिंह, बबलू द्विवेदी, जयनरायन प्रजापति ने बताया कि एक सप्ताह पहले हल्की बूंदा-बांदी हुई थी। इसके बाद से बारिश नहीं हुई है। इस कारणधान की रोपाई नहीं हो रही है। निजी नलकूपों से पानी लगाकर धान की रोपाई कर रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक एसपी सोनकर ने कहा कि जहां बारिश अच्छी होने से पर्याप्त नमी है, वहां पर ही किसान बुआई करें। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार 15 जुलाई तक मानसून आने की संभावना है। गुुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री रहा।
उप कृषि निदेशक हरिशंकर भार्गव का कहना है कि अब तक हुई छिटपुट बारिश में किसानों ने 482 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई कर दी है। 112 हेक्टेयर में उड़द व 110 हेक्टेयर में मूंग की फसलें बोई हैं। इन्हें निजी नलकूपों से पानी देकर उन्हें बचाने में जुटे हैं। मौसम विभाग ने अभी कुछ दिन ऐसी ही गर्मी बनी रहने की संभावना जताई है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम डायरिया प्रभावित खालेपुरा और पुराना बेतवा घाट पहुंची। पीड़ितों का इलाज कराया।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आरके यादव ने बताया कि खालेपुरा के रामचंद्र निषाद के तीन बच्चे दीपक (3), रागिनी (11), सोहित (7) डायरिया से ग्रसित मिले। इनमें से दो को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। जल संस्थान को पानी ते नमूने लेने के लिए लिखा गया है। ओआरएस पाउडर और क्लोरीन की गोलियां बांटी गईं।