जिला अस्पताल में टीका लगवाती दिव्यांशी अपनी मां महिमा मिश्रा के साथ।
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हमीरपुर। जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे टीकाकरण चल रहा है। यहां पर ज्यादातर बच्चे 15 से 17 वर्ष के मौजूद मिले। वह दूसरी डोज लगवाने के लिए आए हैं। कुछ बूस्टर डोज के लिए मौजूद मिले। कुछ ऐसे भी हैं जो पहली डोज लगवाने आए हैं। इसी बीच कक्षा नौ के छात्र संकल्प तिवारी अपने पिता के साथ गेट के अंदर दाखिल हुए। वहां मौजूद नर्स से पूछा कि वैक्सीन कहां लगती है। उसने बगल में बने कमरे की ओर इशारा कर बता दिया। संकल्प ने महिला कर्मचारी को आधार कार्ड दिखाया। कर्मचारी ने उन्हें और बच्चे आ जाने की बात कहकर इंतजार करने के लिए कहा। दूसरी डोज लगवाने अपनी मां महिमा मिश्रा के साथ आई इंटर की छात्रा दिव्यांशी इंजेक्शन की चुभन से चीख उठी।
सत्यम से पूछा कि टीका लगवाने से क्या फायदा होगा ? वह बोला, कोरोना महामारी से बचने के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। कर्मचारी कहते हैं कि एक वायल में 20 डोज होती हैं। जब तक 15 से 20 बच्चे मौजूद नहीं होंगे तो टीका के लिए इंतजार करना होगा। पिता कहते हैं कि सत्यम वैक्सीन लगवाने की जिद कर रहा था। लेकिन बच्चे कम होने कारण एक घंटे से इंतजार कर रहे हैं। तभी 20 किमी दूर से आनूपुर मोड से वैक्सीन लगवाने साहिल कुमार भी आ गया। हाईस्कूल की छात्रा गार्गी अपनी मां पूनम मिश्रा के साथ आई। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा रानी प्रथम डोज लगवाने केंद्र में दाखिल हुईं। रानी ने इंजेक्शन देखते ही आंखे बंद कर लीं और सुई चुभते ही चीख पड़ी।
46 हजार 768 बच्चों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य है। अभी तक दो हजार बच्चों ने टीका लगवाया है। अगले सोमवार से 14 सेंटरों में 12 से 14 साल आयु वर्ग के बच्चों को वैक्सीन लगवाई जाएगी। परिषदीय व बोर्ड परीक्षाओं के चलते काम धीमा है।
-डॉ. एके रावत, सीएमओ