हमीरपुर। अनुमति मिली तो जिले के पांच स्थानों पर 29 आतिशबाजी की दुकानें लगेंगी। जिले में 12 स्थायी लाइसेंस हैं और 17 आतिशबाजों ने अस्थायी दुकानों के लाइसेंस के आवेदन किए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार इस बार दिवाली में हरित पटाखे ही दगाए जाने हैं। अफसरों ने अभी किसी भी दुकान को स्वीकृृति नहीं दी है।
जिले में अलग-अलग पांच स्थानों पर आतिशबाजी की करीब 29 दुकानें लगवाने की तैयारी है। शहर में पुराना तहसील बंगला मैदान, राठ में वीएबी कॉलेज, सुमेरपुर में तपोभूमि मैदान, मौदहा में मीरा तालाब और कुरारा में मंडी के बगल में चयनित की गई है। जिले में 12 आतिशबाजों के स्थायी लाइसेंस हैं। इसमें छह को आतिशबाजी बनाने व छह को बेचने की अनुमति है। जिलेभर से अब तक आतिशबाजी बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस के लिए अग्निशमन विभाग के पास 17 आवेदन आए हैं। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दुकानें लगाने की स्वीकृति देंगे। फिलहाल अब तक एसडीएम ने किसी भी आतिशबाज को दुकानें लगाने की अनुमति नहीं दी है। इसकी वजह कोर्ट के निर्देशानुसार हरित पटाखों को ही बिक्री की अनुमति दिया जाना है।
जिले के किसी आतिशबाज के पास हरित पटाखे नहीं
जिले में अभी किसी भी दुकानदार के पास हरित आतिशबाजी नहीं है। इसके साथ ही अब इतना समय भी नहीं बचा है कि आतिशबाज सामग्री बना सकें। वहीं बाहरी जिलों से भी हरित पटाखे आदि मिलने की संभावना भी न के बराबर है। क्योंकि शायद ही किसी आतिशबाज ने अधिक मात्रा में हरित पटाखे बनाएं हों।
आतिशबाजों को हो सकता है लाखों का नुकसान
जिले में आतिशबाजी की सामग्री बनाने और बेचने के लिए छह आतिशबाजों के पास स्थायी लाइसेंस हैं। वह दिवाली त्योहार की तैयारियों के मद्देनजर अब तक लाखों रुपये की आतिशबाजी बना चुके हैं। ऐसे में यदि अफसर हरित पटाखों को ही बेचने की अनुमति देते हैं तो लाखों की आतिशबाजी खराब हो सकती है।
इनसेट
आतिशबाजी की दुकानें लगाने के लिए आए आवेदनों पर संबंधित क्षेत्राधिकारी और अग्निशमन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। दोनों अफसरों की रिपोर्ट के आधार पर ही दुकानें लगाने की अनुमति दी जाएगी।
- संजय कुमार मीणा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट