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खाद की मारामारी खत्म होने का नाम लहीं ले रही

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सुमेरपुर में क्रय विक्रय समिति में भिड़ते युवा किसान। - फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। क्रय-विक्रय केंद्र पर खाद वितरण के दौरान पहले पाने की होड़ में किसानों के बीच मारपीट हो गई। पुलिस मारपीट करने वालों को थाने में ले गई।
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मंगलवार को सिर्फ क्रय-विक्रय केंद्र में खाद उपलब्ध होने से किसानों की मारामारी मची रही। किसानों को दो बोरी खाद दिए जाने के लिए घंटों लाइन पर खड़ा होना पड़ा। महिला किसानों को भी धक्का-मुक्की का शिकार होना पड़ा। किसानों के बढ़ते दबाव के चलते सचिव ने पुलिस को बुलाई। तब कहीं जाकर मामला संभल सका। लेकिन इसी बीच लाइन लगाने को लेकर आपस में झगड़ा हो गया। इस पर कई युवा आपस में भिड़ गए और एक दूसरे को जमकर पीटा। पुलिस इन्हें पकड़कर थाने ले गई। उधर, सचिव शुभम त्रिपाठी ने बताया कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस की है। उनके पास जितनी खाद थी। वह वितरित कर दी गई है।
शटर गिरता देख दुकान में घुसे किसान
कुरारा। मंगलवार को कस्बे के बेरी रोड में सन्या ट्रेडर्स के यहां एक ट्रक खाद आने की खबर पर किसानों की भीड़ जमा हो गई। भारी भीड़ देख डीलर के शटर गिराते देख किसान दुकान के अंदर घुस गए। जिस पर डीलर मशीन लेकर बाहर की ओर भाग निकला। समझाने बुझाने के बाद किसान शांत हुए। शंकरपुर गांव के किसान उमाकांत ने बताया कि भौली रोड स्थित खाद की दुकान में 1400 रुपये प्रति बोरी खाद खरीदी है। (संवाद)
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दुकानों पर तय से ज्यादा दाम में बिक रही खाद
माह के अंत तक समितियों में डीएपी आने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआसुमेरपुर। समितियों से डीएपी के नदारद होने पर किसानों की बेचैनी बढ़ गई है। मजबूर किसान बाजार से तय दाम से ज्यादा पर डीएपी खरीदने को मजबूर हैं।
कस्बे के दुकानदारों का आलम यह है कि यह शासन द्वारा तय किए गए दामों से 100 से 200 रुपये ज्यादा में बेच रहे हैं। मंगलवार को समितियों से डीएपी नदारद थी। सहकारी समिति के सचिव योगेंद्र सिंह ने बताया कि 29 अक्तूबर तक डीएपी आने की संभावना है। डीएपी के एक बैग की कीमत 1200 रुपये निर्धारित है। बाजार में मंगलवार को खाद विक्रेताओं ने 1350 से लेकर 1400 रुपये प्रति बैग डीएपी खाद बेची। विदोखर पुरई से आए किसान महेश्वरीदीन यादव, मान सिंह भदौरिया, बउवा खंगार, किशोरा खंगार, देवीदीन श्रीवास आदि ने बताया कि इससे कम में दुकानदार डीएपी देने को तैयार नहीं है। दस रुपये प्रति बैग पल्लेदारी के नाम पर वसूले जाते हैं। किसानों का कहना कि सहकारी समितियों में मिलने वाली खाद में जो गुणवत्ता है वह बाजार में मिलने वाली में नहीं है।
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