हमीरपुर। सुमेरपुर के ग्राम पत्योरा में वर्ष 1980 में दस्यु सरगना रामकरन सिंह के भाई की हत्या में आजीवन कारावास काट रहे जगत सिंह को 16 साल बाद मेडिकल और अच्छे चाल चलन पर रिहाई मिली है। गांव पहुंचे जगत परिवार से मिले तो घर में दिवाली की खुशियां दोगुनी हो गईं।
यमुना पट्टी के बीहड़ में बसा पत्योरा गांव हमेशा सुर्खियां रहा है। करीब 46 वर्ष पूर्व साड़ की हत्या को लेकर दो गुटों के बीच पैदा हुई दुश्मनी आज भी लोगों के दिलो दिमाग बसी है। इस जंग में कई परिवार बर्बाद हो गए। इसका दर्द आज भी उन परिवारों को चुभता है। 16 वर्ष बाद रिहा हुए जगत सिंह (64) ने बताया कि चार दशक पूर्व हुई दुश्मनी आज तक पीछा कर रही है। कहा कि गांवदारी व दोस्ती के चलते इस हत्याकांड में फंस गए।
बताया कि दस्यु रामकरन सिंह से गांव के दूसरे परिवार से दुश्मनी थी। 21 जून 1976 में गांव के रामबहादुर सिंह के घर डकैती पड़ी। इसमें महिला, एक बदमाश रामपाल सिंह बेंदा जौहरपुर (बांदा) व तीन ग्रामीणों की हत्या हुई थी। इसके बाद जगत सिंह के घर बदमाशों ने धावा बोला था। तीन हत्याएं और हुई थीं। इसी का बदला लेने के लिए वर्ष 1980 में जयकरन सिंह की हत्या कर दी गई थी। इसमें पांच लोग रणविजय सिंह, अयोध्या सिंह, रामबहादुर सिंह, इंद्रपाल सिंह व उनको नामित किया गया था।
बताया कि स्थानीय अदालत ने वर्ष 1981 में केस की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई कर वर्ष 2005 में सभी को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास सुनाया। पुलिस ने चार मई 2006 को उन्हें व उनके चचेरे भाई इंद्रपाल सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कहा जेल में 16 वर्ष बिताने के बाद मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने उनकी सजा माफ कर रिहा करने का आदेश दिया। कहते हैं अब जीवन का अंतिम पड़ाव है।
जेल में सब बाबा कह कर पुकारते थे
जगत ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद 10 माह तक जेल में बंद रहना तो समझ में आया है। इसके बाद जेल में लंबरदार (सीओ) बना दिया गया। कहते हैं कि उन्होंने किसी भी कैदी को सताया नहीं है। बताया कि जेल में बंद साढ़े पांच हजार कैदियों में करीब तीन सौ ही उनका असली नाम जानते होंगे, बाकी सब बाबा के नाम से पुकारते थे।
16 साल बाद सुनी भगवान ने पुकार
पत्नी प्रेमलता बताती हैं कि भगवान ने उनकी सुन ली। 16 वर्ष बाद उसका वनवास खत्म हुआ है। कहती हैं पति के जेल जाने के बाद पांच बच्चों की परवरिश कर शादी की। कहती हैं कि सरकार की हमेशा आभारी रहेंगी।
पांच लोगों को हुई थी सजा
1980 में हुई हत्या के मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिसंबर 2005 में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसमें पुलिस ने दो दोषियों को मई 2006 में गिरफ्तार कर नैनी सेंट्रल जेल भेजा था। पांच दोषियों में एक की हत्या हो गई, वहीं दूसरे ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। एक दोषी को गत वर्ष पुलिस गिरफ्तार कर जेल चुकी है। वहीं एक सजायाफ्ता आरोपी को बीमारी के कारण 13 वर्ष बाद सरकार ने सजा माफ कर वर्ष 2019 में रिहाई कर दी थी।
एक साल पूर्व जेल गया पांचवां उम्रकैद का सजायाफ्ता
हमीरपुर। दस्यु सरगना रामकरन सिंह से पंगा लेने वाले एक हत्या के मामले में पत्योरा के अयोध्या सिंह पिछले पांच मार्च 2020 को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। यह आजीवन कारावास की सजा में पिछले 15 साल साधु वेश में छिपा इधर उधर घूमता रहा। फिलहाल इसकी तलाश में जुटी जैसे ही उसके कानपुर में होने की सूचना मिली और पुलिस ने छापेमारी तेज की तभी अयोध्या सिंह वहां से भाग कर गांव आ गया। देर से जेल गए अयोध्या सिंह की उम्र करीब 70 वर्ष हो गई है। (संवाद)