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फागुन के महीने में जेठ की गर्मी का एहसास

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हमीरपुर। अभी चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने में दो दिन शेष हैं। फागुन की दोपहरी इस बार जेठ महीने की तरह तप रही है। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पिछले साल 30 मार्च को तापमान 38 डिग्री था। तापमान बढ़ने से दिन चढ़ने के साथ ही गर्म हवाएं चलने लगती हैं। अंगोछा व टोपी से सिर ढंके बिना दोपहर में सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। बढ़ते तापमान का दुष्प्रभाव पशु-पक्षियों व फसलों पर भी दिख रहा है। लोगों का कहना है कि जब मार्च महीने में यह हाल है तो मई व जून में तो आग बरसेगी।
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समय से पहले पक गई फसलें
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एसपी सोनकर ने बताया कि तापमान बढ़ने से पिछैती गेहूं की फसलें समय के पहले ही पक गईं। जिससे फसलों में दाना कमजोर होने की आशंका है। वहीं जायद सीजन की मूंग व सब्जी की बोई फसलें दोपहर में मुरझाने लगी हैं। जो फसलें बाद में बोई गईं उनमें अंकुरण देरी से हो रहा है। तापमान अधिक होने से बीजों में अंकुरण कम होगा। पहले बोई गईं फसलों में किसान सिंचाई करते रहें।
बढ़ने लगी गर्मी जनित बीमारियां
तापमान अधिक होने से लोग गर्मी जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की पुरुष ओपीडी में बुधवार को 640 मरीजों ने इलाज कराया। वहीं पिछले सोमवार को 1000 व मंगलवार को 826 मरीजों ने पर्चे बनवाए। सबसे अधिक खांसी, बुखार, सिरदर्द व डायरिया से पीड़ित रोगियों की संख्या अधिक है।
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डायरिया के बढ़ रहे मरीज
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष निरंजन ने कहा कि गर्मी में सिर पर ठंडा पानी न डालें। धूप से आने के बाद तुरंत मुंह भी न धोएं। ऐसा करने से बीमार हो सकते हैं। बाहरी खानपान का सेवन करने से बचें। कहा कि डायरिया से पीड़ित 45 मरीज मिले हैं। जिसमें दो बच्चों की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें भर्ती कराया गया है।
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