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Hamirpur News: ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए जमीन के सीमांकन से किसान चिंतित

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फोटो16एचएएमपी-01 कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने जाते किसान। संवाद
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कलक्ट्रेट में किसान बोले-जमीनें चली गई तो कैसे होगी गुजरबसर

किसानों की मांग, बचाई जाएं जमीनें, बढ़ाया जाए सर्किल रेट
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। कानपुर से कबरई तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण से मौजा हेलापुर डांडा और चंदुलीतीर के किसानों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यह मार्ग उनकी आजीविका छीन लेगा, क्योंकि उनकी अधिकांश खेती की जमीन इस परियोजना की जद में आ रही है। किसानों ने प्रशासन से सर्किल रेट बढ़ाने और कम से कम जमीन अधिग्रहण की मांग की है।

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है और यदि यह छिन गई तो वे खेती कहां करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सर्किल रेट बहुत कम है, जबकि हमीरपुर से निकटता के कारण जमीन का बाजार मूल्य कहीं अधिक है। जमीन तो चली ही जाएगी, साथ ही मिलने वाला मुआवजा नई जमीन खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं होगा, जिससे वे आर्थिक संकट में पड़ जाएंगे और पलायन को मजबूर होंगे। उमेश चंद्र ने बताया कि उनकी 10 बीघा जमीन में से सात बीघा हाईवे में जा रही है, जिससे वे भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
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आठ गुना सर्किल रेट और कम अधिग्रहण की मांग सोमवार को हेलापुर डांडा और चंदुलीतीर के किसानों का एक दल कलक्ट्रेट पहुंचा। उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। किसानों ने कहा कि उन्हें अभी तक नोटिस नहीं मिला है लेकिन हाईवे निर्माण के लिए उनकी जमीनों को चिह्नित कर सीमांकन कर दिया गया है।
प्रशासन से मांग की है कि मौजा हेलापुर डांडा एवं चंदुलीतीर का सर्किल रेट आठ गुना बढ़ाया जाए और जमीन का अधिग्रहण कम से कम किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में लक्ष्मीनारायण, देशराज, सियाराम, कृपाशंकर, मोहम्मद हसन, सत्येंद्र, नरेंद्र, मूलचंद्र, रामबरन सिंह, बिंदिया देवी, प्रधान प्रतिनिधि नाथूराम समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल थे।
चली जाएगी 22 बीघा जमीन

फोटो16एचएएमपी-02 राजेश

हेलापुर के किसान राजेश का कहना है कि उसके पास 44 बीघा जमीन है। वह खेती पर ही पूरी तरह निर्भर है। हाईवे में जो सीमांकन हुआ है उसके आधार पर 22 बीघा जमीन चली जाएगी। इस वजह से वह चिंतित है कि जमीन भी जा रही और उसका मुआवजा भी अच्छा नहीं मिलेगा।
फोटो16एचएएमपी-03 नवला देवी

मेहनत से बनाया घर उजड़ जाएगा

हेलापुर डांडा गांव की नवलदेवी का कहना है कि उसने बड़ी मेहनत से अपने खेत पर ही मकान बनवा लिया था। छह कमरों का रिहायशी मकान हाईवे में आ रहा है। पानी के इंतजाम के लिए बोरिंग कराई थी। बना हुआ आशियाना उजड़ जाएगा। जमीन भी चली जाएगी तो बच्चे क्या करेंगे, क्या खाएंगे।
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विद्यालय का सपना हुआ चकनाचूर
-फोटो16एचएएमपी-04 सियाराम

हेलापुर डांडा गांव के सियाराम का कहना है कि गांव में विद्यालय बनाने का सपना बहुत पहले देखा था। मेरे बेटे ने प्रयास किया और विद्यालय की इमारत बनवानी शुरू कर दी। आठ कमरे बन चुके है बस छत पड़नी बाकी है। अधिकारियों ने काम रुकवा दिया। कहा कि यह जमीन हाईवे के लिए जरूरी है। बहुत पैसा भी खर्च हो गया। अब विद्यालय का सपना टूट गया है।
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