फोटो25एचएएमपी 33- 25 सिंतबर के अंक में प्रकाशित खबर।
फोटो25एचएएमपी 34- स्ट्रेचर खींच रहे तीमारदार से बात करते जिलाधिकारी। संवाद
फोटो25एचएएमपी 35- भर्ती मरीज की पट्टी कराने के लिए स्ट्रेचर लेकर जाती महिला। संवाद
= डीएम ने पूछा कहां है वार्ड ब्वॉय, तीमारदार ले जा रहे स्ट्रेचर पर मरीज
= अमर उजाला की खबर पर लगी मुहर, सामने आई हकीकत
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ उनके तीमारदारों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर खींचने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में अस्पताल आइए, मददगार साथ लाइए शीर्षक से खबर प्रकाशिक की, जिस पर सच्चाई की मुहर उस वक्त लग गई जब जिलाधिकारी अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए। उनके सामने ही तीमारदार मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए मिला। यह देख उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई। कहा कि मरीज को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से ले जाने की जिम्मेदारी वार्ड ब्वाय की है। तीमारदारों से यह काम किसी भी हालत में न कराया जाए।
जिलाधिकारी अशोक कुमार ने शुक्रवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। वह सबसे पहले इमरजेंसी में पहुंचे और वहां पर दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। यहां पर उपचार करा रही दिव्यांशी से बात भी की। इसके बाद उन्होंने वार्डों में भर्ती मरीजों और तीमारदारों से दवाइयों की उपलब्धता, इलाज और स्टाफ के व्यवहार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल की एक्स-रे, सीटी स्कैन, ऑर्थोपेडिक्स, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक, एनआरसी, आयुष्मान केंद्र, टीबी वार्ड, फिजियोथेरेपी और नई डायलिसिस यूनिट समेत विभिन्न इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान सीएमओ डॉ. अलका शुक्ला, सीएमएस डॉ. आरएस प्रजापति प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
अस्पताल में सुधार की जरूरत
डीएम ने कहा कि अस्पताल की साफ-सफाई, बेडशीट की स्वच्छता और प्रबंधन में सुधार की जरूरत बताई। सर्जन की कमी के कारण कुछ मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। शासन स्तर पर वार्ता कर सर्जन की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। सीएमओ और सीएमएस को अस्पताल प्रबंधन और वार्ड ब्वाय की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बाहर की दवा लिखी तो कार्रवाई
डीएम ने चिकित्सकों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयां ही मरीजों को देने के निर्देश दिए। अनावश्यक रूप से बाहर की दवाइयां लिखने पर रोक लगाई। उन्होंने कहा कि केवल अति गंभीर और क्रिटिकल मरीजों को ही रेफर किया जाए। सामान्य उपचार वाले मरीजों को जिला अस्पताल में ही बेहतर इलाज देने का प्रयास हो। औषधि भंडार में रेबीज और सर्पदंश रोधी टीके पर्याप्त मिले।
-
खुले तेल पर भी लगाई रोक
अस्पताल की रसोई में साफ-सफाई का जायजा लेते हुए डीएम ने मरीजों को मेन्यू के अनुसार पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन देने के निर्देश दिए। भोजन बनाने में केवल ब्रांडेड और पैक्ड तेल इस्तेमाल करने को कहा। खुले तेल के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए।
68 बेड, मरीज बढ़े तो 92 की व्यवस्था
सीएमएस डॉ. आरएस प्रजापति ने बताया कि अस्पताल में 68 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुए 24 अतिरिक्त बेड लगाकर 92 बेड की व्यवस्था की गई है। इन दिनों अधिकांश मरीज वायरल बुखार से पीड़ित हैं। इलाज के बाद सात से आठ दिन में अधिकांश मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। ब्लड बैंक में 26 यूनिट रक्त उपलब्ध मिला।
फोटो25एचएएमपी 34- 25 सिंतबर के अंक में प्रकाशित खबर।
फोटो25एचएएमपी 34- 25 सिंतबर के अंक में प्रकाशित खबर।