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Hamirpur News: आठवें वेतन आयोग में पेंशनरों को शामिल करने की मांग तेज

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फोटो29एचएएमपी- 03 कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते सेवा निवृत्त कर्मचारी। संवाद
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हमीरपुर। आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने की मांग समेत 12 सूत्री मांगों को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने मंगलवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च किया। बाद में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त एसडीएम पैगाम हैदर को सौंपा।
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शहर के नगर पालिका रैनबसेरा में पहले संगठन के पदाधिकारियों ने बैठक की। इसके बाद जिलाध्यक्ष श्यामचरन साहू के नेतृत्व में पैदल मार्च किया। अतिरिक्त एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि 16 जनवरी 2025 को आठवें वेतन आयोग की घोषणा के बाद पेंशनरों को उम्मीद जगी थी लेकिन आयोग की प्रक्रिया में हो रहे विलंब से असंतोष है। संगठन का आरोप है कि वित्त विधेयक (वैलिडेशन एक्ट) 2025 के प्रावधानों से एक जनवरी 2026 से पहले और बाद के पेंशनरों के बीच अंतर की स्थिति बन रही है। इसे समाप्त कर पुराने पेंशनरों को भी आठवें वेतन आयोग के दायरे में लाने की मांग की गई।
ज्ञापन में 2025 में हुए विभिन्न आंदोलनों और करीब 50 हजार हस्ताक्षरयुक्त याचिकाएं भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया। अध्यक्ष ने कहा कि इसके बावजूद मांगों का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। यहां पर रामबाबू, बद्रीप्रसाद, रघुनाथ पाल, गुलाब खां, बिहारी लाल, सीताराम पाल, असरफ अली, सुभाष, अमर चंद्र द्विवेदी, देवीदयाल प्रजापति, राजेश कुमार खरे, श्यामकिशोर शर्मा, राजकिशोर नामदेव, रामश्री आदि सेवानिवृत्त कर्मचारी मौजूद रहे।
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इन 12 मांगों पर किया प्रदर्शन
-वित्त विधेयक 2025 में पेंशनरों में तिथि के आधार पर विभेद पैदा करने वाले अंश को हटाते हुए पुराने पेंशनरों को आठवें वेतन आयोग की सीमा में लाया जाए।
-वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रहे विलंब को दृष्टि में रखते हुए पर्याप्त अंतरिम सहायता को स्वीकृत किया जाए।
-भारत सरकार के निर्देशानुसार अलग सीपीआई लागू की जाए।
-लंबित वेतन-पेंशन संबंधी लाभ दिलाया जाए
-पेंशन कम्यूटेशन की कटौती 10 वर्ष में बंद कर दी जाए।
-65 वर्ष के बाद हर पांच वर्ष में पांच प्रतिशत पेंशन बढ़ाना शामिल हैं।
-पेंशन को आयकर से मुक्त रखा जाए।
-कोरोना काल के 18 माह के डीए/डीआर का भुगतान किया जाए।
-वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में 50 प्रतिशत छूट दी जाए।
-आयुष्मान भारत में कैशलेस उपचार की सीमा 10 लाख रुपये की जाए।
-50 प्रतिशत से अधिक महंगाई भत्ते को मूल वेतन/पेंशन में मर्ज किया जाए।
-वरिष्ठ नागरिक आयोग गठित किया जाए।
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