फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केक काटकर 56 भोग लगाया, गूूंजे जयकारे

विज्ञापन
विज्ञापन
हमीरपुर। सैकड़ों साल पुराने बांके बिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की सोमवार को धूम मची रही। बांके बिहारी, जूदेव मंदिर में श्रीकृष्ण की मनोहारी मूर्ति का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। जयकारे गूंजे। इस बार 31 किलो का केक काटकर श्रीकृष्ण का 56 प्रकार का भोग लगाया गया।
विज्ञापन

गहरौली स्थित बांके बिहारी, जूदेव मंदिर बुंदेलखंड क्षेत्र का एकलौता मंदिर है, जहां सैकड़ों साल पहले अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ बड़े आंदोलन का प्लान बना था। यह मंदिर काफी बड़े क्षेत्र में बना है। जिसके अंदर गहरी सुरंगें गांव के तालाब तक जुड़ी हैं। इसी सुरंग के सहारे क्रांतिकारी अंग्रेजी फौजों से बचने के लिए ठिकाना बदलते थे। मंदिर की विशेषता है कि भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के पास माथा टेकने मात्र से ही कल्याण हो जाता है। इसके अलावा हमीरपुर में मराठाकालीन राधा कृष्ण मंदिर, महावीरन मंदिर व पुलिस लाइन में स्थित प्राचीन मंदिर में भी जन्माष्टमी की धूम रही।
मंदिर प्रमुख विमल चंद्र गुरुदेव ने कहा इस बार झिलमिल झालरों से मंदिर सजाया गया है। 31 किलो फूल मंगवाए गए। साथ ही रात 12 बजे धूमधाम से श्रीकृष्ण का जन्मदिन मना केक काटा गया। बांके बिहारी मंदिर में सोमवार दोपहर से श्रीकृष्ण की मनोहारी मूर्ति और अन्य प्रतिमाओं का दूध, घी, शहद और गंगाजल से जलाभिषेक किया गया। यह कार्यक्रम करीब एक घंटे चला। इसके बाद वस्त्र पहनाकर उन्हें मोतियों की माला पहनाई गईं। मंदिर के पुजारी राजाभइया दीक्षित ने बताया जन्मोत्सव पर हजारों लोग उत्साह से मंदिर आए।
विज्ञापन

बलदाऊ मंदिर में भजन हुआ
हमीरपुर। शहर के बलदाऊ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष सजावट की गई है। रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया है। शाम 7 बजे से भजन संध्या का आयोजन हुआ। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं उनकी लीलाओं से संबंधित भजनों को प्रस्तुत किया गया। बलदाऊ मंदिर का निर्माण 141 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1937 में लाला गोपाल दास ने करवाया था। मंदिर में श्रीकृष्ण व बलराम की अष्टधातु की मूर्तियां विराजमान हैं। प्रबंध सुनील अग्रवाल देखरेख करते हैं। मंदिर से गरीब असहाय लोगों के लिए रोटी सेवा का कार्य पिछले कई सालों से चल रहा है। पुजारी जगत प्रसाद ने बताया दानदाताओं से प्राप्त होने वाली धनराशि से रोटी सेवा संचालित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें