लोहिया गांव धौहल में पानी का भीषण संकट है। जलस्तर नीचे जानेे से पेयजल
योजना जवाब दे गई है। आबादी के अंदर के 50 फीसदी हैंडपंप खराब पड़े हैं। दो
तालाबों में धूल उड़ रही है, जबकि एक में कीचड़ बजबजा रहा है। ग्रामीण
प्राचीन प्रदूषित कुं ओं का पानी पीने को मजबूर है। कोई भी जिम्मेदार गुहार
के बाद भी ग्रामीणों की सुध नहीं ले रहा है। पेश है पानी संकट दर्शाती एक
रिपोर्ट।
जलस्तर नीचे जाने से योजना ठप
गांव
में पेयजल के लिए जलनिगम ने 2007-08 में एकल पेयजल योजना स्थापित कर नलकूप
लगवाया और जलापूर्ति के लिए पानी की टंकी बनाकर पाइप लाइनों के सहारे
आपूर्ति भी शुरू कर दी। कुछ दिन तो सब ठीक रहा फिर धीरे-धीरे जलस्तर गिरने
से योजना फ्लाप होने लगी। अब स्थिति बहुत ही विकराल हो गई है। नलकूप ने
पानी देना ही बंद कर दिया है। आपरेटर नरेशचंद्र ने बताया कि इसकी सूचना
विभाग के अफसरों को दे दी है। जलापूर्ति दो माह से ठप है।
उथले तालाबों में नहीं ठहरा पानी
गांव
में तीन बड़े तालाब हैं। लेकिन गहराई न होने से बारिश के कुछ महीने बाद
सूख गए। मौजूदा समय में दो तालाबों में धूल उड़ रही है। बस एक में ही कीचड़
व कामचलाऊ पानी है। गांव के राजू विश्वकर्मा, अजय शुक्ला, इंद्रमणि
द्विवेदी ने बताया कि तालाब सूखे होने से जानवरों को सबसे ज्यादा दिक्कत
है। सरकार तमाम योजनाएं चलाती है। अगर इन तालाबों की गहराई बढ़ा दी जाए तो
भूगर्भ जलस्तर भी बढ़ेगा और ग्रामीणों को राहत भी मिलेगी।
तीन प्राचीन कुओं में लग रही भीड़
गांव
की आबादी के अंदर लगे 30 हैंडपंपों में से 15 हैंडपंप खराब हैं। विमलेश,
महेशचंद्र शुक्ला ने बताया कि बस स्टैंड, प्राथमिक स्कूल, कन्या प्राथमिक,
शिव मंदिर के पास सहित 15 हैंडपंप खराब है। जलस्तर नीचे चला गया है।
अधिकारी गांव आते हैं और देखकर चले जाते हैं। गांव के लोग तीन प्राचीन कुओं
के भरोसे हैं।
बीडीओ सरीला अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि निजी नलकूप मालिक तालाब भरने को तैयार
नहीं हैं। पेयजल योजना का नलकूप भी पानी नहीं दे रहा है। ग्राम पंचायत में
कुल 64 हैंडपंप है, जिसमें सात रिबोर लायक है। रिबोर हैंडपंपों की सूची
जलनिगम को भेज दी गई है। बाकी सब हैंडपंप चालू हैं।
अधिशाषी अभियंता जलनिगम आरएस मौर्या कहते हैं कि पेयजल
योजना फेल होने की जानकारी मिली है। गांवों में जलापूर्ति के लिए नया
नलकूप लगाने की योजना बनाई गई है। रिबोर हैंडपंप की सूची ग्राम पंचायत ने
अभी तक नहीं दी है। छोटी मोटी कमी वाले हैंडपंपों की कमी ग्राम पंचायत को
खुद ठीक करा देनी चाहिए।