जिले की निकायों में कचरा डालने का कोई स्थान तय नहीं है। अकेले मुख्यालय में देखा जाए तो प्रतिदिन 12 टन कचरा निकलता है। लेकिन कूड़ा प्रबंधन के लिए डंपिंग प्वाइंट न होने से सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। प्रतिदिन करीब चार टन कचरा सड़कों की गलियों में पड़ा रह जाता है। कई जगह तो सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, धर्म स्थलों के आसपास भी कचरे के ढेर लगे देखे जा सकते है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। लेकिन इस अभियान की कमर नगर निकाय ही तोड़ रही है। पालिका के कूड़ादानों की हालत दयनीय है। हर जगह कूड़ा डिब्बे के अंदर न रहकर फैला देखा जा सकता है।
मुख्यालय में विद्या मंदिर से बाजार को जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले चौराहे पर डाले जाने वाले कूड़े से पूरा मोहल्ला परेशान है। हल्की हवा से उड़ने वाला कूड़ा लोगों के घरों में घुस जाता है। शहर को गंदगी से मुक्त रखने के उपाय नहीं हो रहे है।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाए जाने के कार्य की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मौजूदा समय में कालपी मार्ग पर सिटी फारेस्ट के पास गहराई में कचरा डालकर काम चलाया जा रहा है। हालांकि इस कचरे से उठने वाली बदबू से आसपास के लोग परेशान रहते है।
नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी बुद्धिप्रकाश यादव ने कहा कचरा प्रबंधन का
कार्य अभी तक चालू नहीं हो पाया है। शासन से 38 लाख मांगे है। 87
कर्मचारियों के जरिए सफाई का कार्य कराया जा रहा है। सुबह आठ से तीन बजे तक
कसबे में सफाई कराई जा रही है। सफाई के लिए नगर को दो भागों में बांटकर
सफाई कराई जा रही है।