गोहांड (हमीरपुर)। प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी)-2010 में फर्जीवाड़ा में शामिल ब्लॉक के बीरा गांव निवासी छात्र जितेंद्र कुमार व साल्वर को ग्वालियर की विशेष सत्र अदालत ने पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई गई है। दोषी छात्र के परिजनों ने उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
कस्बा मुख्यालय से करीब दो किमी. दूर बीरा गांव निवासी जितेंद्र कुमार राजपूत के स्थान पर मध्यप्रदेश में पीएमटी-2010 में कोई दूसरा परीक्षार्थी परीक्षा दे रहा था। फोटो व हस्ताक्षरों के मिलान न होने पर कक्ष निरीक्षकों को संदेह हुआ, सख्ती से पूछने पर जितेंद्र के स्थान पर परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी (साल्वर) ने सच्चाई उगल दी। सूचना पर ग्वालियर पुलिस ने सॉल्वर के साथ जितेंद्र को भी हिरासत में ले लिया।
बड़ी संख्या में ऐसे मामले होने की वजह से कोर्ट के आदेश से फर्जीवाड़ा की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। मामले में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सॉल्वर सहित जितेंद्र कुमार को इस जुर्म में पांच-पांच साल कारावास की सजा सुनाई है।
बीरा निवासी जितेंद्र शिक्षक पिता दृगपाल राजपूत के तीन पुुत्रों में सबसे छोटा है। बड़े दो भाई घर पर खेतीबाड़ी करते हैं। जितेंद्र की पूरी शिक्षा ग्वालियर में ही हुई है। बड़े भाई निरंजन ने बताया कि जितेंद्र पढ़ने में होशियार था। परिवार को उससे बड़ी आशाएं थीं। वह गलत संगत में पड़ गया। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है। बताया कि ग्वालियर में विशेष सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को सजा सुनाई है। कहा वह मामले में वह उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।